टाटा संस ने एन. चंद्रशेखरन को पांच साल का विस्तार दिया, नोएल टाटा का विरोध
टाटा संस का बोर्ड निर्णय
नई दिल्ली। टाटा संस के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के लिए फिर से नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के पक्ष में बोर्ड के सदस्यों ने 4-1 से मतदान किया। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने इस निर्णय का विरोध किया है। उन्होंने इसे गैरकानूनी बताते हुए कहा कि उन्होंने चंद्रशेखरन की नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया था, लेकिन उनके विरोध को कानूनी राय के आधार पर नजरअंदाज कर दिया गया।
नोएल टाटा का विरोध
नोएल टाटा ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया है। बोर्ड में बहुमत के आधार पर निर्णय लिया गया, लेकिन यह प्रक्रिया सही नहीं थी। इस विवाद के चलते मामला टाटा संस की अगली एजीएम तक पहुंच सकता है, जहां चंद्रशेखरन को हटाने की कोशिश की जा सकती है।
आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन का विवाद
आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में छिपा विवाद
यह विवाद टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन से जुड़ा हुआ है, जिसमें कहा गया है कि टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नियुक्त निदेशकों के बहुमत को कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी देनी होती है। बोर्ड की बैठक में यदि वोट बराबर हो जाए, तो चेयरमैन के पास निर्णायक वोट होता है, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया।
टाटा संस की अगली एजीएम
अब सभी की नजर टाटा संस की अगली एजीएम पर है, जो 31 दिसंबर तक आयोजित होनी है। इस बैठक में चंद्रशेखरन का निदेशक के रूप में रिटायर होना एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। दोबारा निदेशक बनने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी आवश्यक होगी। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इसलिए एजीएम में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
लिस्टिंग का मुद्दा
लिस्टिंग का इश्यू सामने
चंद्रशेखरन का दोबारा चेयरमैन बनना ऐसे समय में हुआ है, जब टाटा संस के सामने लिस्टिंग का बड़ा मुद्दा है। रिजर्व बैंक ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी का रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी है। इसके बाद कंपनी के शेयर बाजार में लिस्ट होने की आवश्यकता फिर से चर्चा में आ गई है।
चंद्रशेखरन का कार्यकाल
चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस के चेयरमैन हैं। उनके कार्यकाल में एयर इंडिया का अधिग्रहण और सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एविएशन जैसे नए कारोबारों में विस्तार जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। अब बोर्ड के निर्णय के बाद उनका कार्यकाल बढ़ाने का रास्ता खुल गया है, लेकिन नोएल टाटा का विरोध इस मामले को पूरी तरह समाप्त नहीं करता। अगली बड़ी नजर एजीएम और शेयरधारकों के निर्णय पर रहेगी।
