ट्रंप ने फोर्ट हूड गोलीबारी के दोषी को मौत की सजा की मंजूरी दी
फोर्ट हूड गोलीबारी का मामला
वाशिंगटन, 6 अक्टूबर (एपी) - राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2009 में टेक्सास के फोर्ट हूड में हुई गोलीबारी के लिए सेना के मेजर निदाल मलिक हसन को मौत की सजा देने की स्वीकृति दी है। अमेरिकी सेना ने 1961 के बाद से किसी को भी मृत्युदंड नहीं दिया है। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि सैन्य मामलों के मंत्री सजा के कार्यान्वयन का समय और स्थान तय करेंगे।
पार्नेल ने कहा, 'आखिरकार हसन के लिए फैसले का दिन आ गया है।' हसन, जो सेना में मनोचिकित्सक के रूप में कार्यरत थे, ने एक चिकित्सा भवन में घुसकर 'अल्लाहु अकबर' का नारा लगाते हुए लेजर पिस्टल से गोलीबारी की थी, जिसमें 13 लोग मारे गए और 30 से अधिक घायल हुए। हसन ने दावा किया था कि उसने सैनिकों को अफगानिस्तान भेजने और अपने मुस्लिम साथियों को मारने से रोकने के लिए ऐसा किया।
मुकदमे के दौरान, उसने अपनी रक्षा के लिए कोई प्रयास नहीं किया। ट्रंप की मंजूरी के बाद, हसन को मौत की सजा देने की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि, 'आर्मी लॉयर' पत्रिका में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यदि हसन नागरिक संघीय अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करता है, तो यह प्रक्रिया कई वर्षों तक लंबित रह सकती है।
सैन्य न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड अत्यंत दुर्लभ है, और इसे लागू करना और भी कठिन है। वर्तमान में, हसन सहित चार लोग कंसास के फोर्ट लीवनवर्थ में सैन्य मृत्युदंड की सूची में हैं। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने 2008 में सेना के विशेषज्ञ रोनाल्ड ग्रे को मृत्युदंड की मंजूरी दी थी, लेकिन एक न्यायाधीश ने इस पर रोक लगा दी थी, और वह अब भी लीवनवर्थ में है।
सैन्य न्याय व्यवस्था में आखिरी बार मौत की सजा प्राइवेट जॉन बेनेट को 1961 में दी गई थी, जब उसे 11 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म के मामले में फांसी दी गई थी।
