डिजिटल टोलिंग प्रणाली: बिना रुके टोल चुकाने की नई व्यवस्था
नई टोलिंग प्रणाली का आगाज़
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि वाहन चालकों को हाईवे पर टोल चुकाने के लिए अब रुकना नहीं पड़ेगा। सरकार डिजिटल और बैरियर-फ्री टोलिंग प्रणाली को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, जिसका लक्ष्य अगले साल फरवरी-मार्च तक इसे शुरू करना है।
वाहन बिना रुके टोल चुकाएंगे
गडकरी ने बताया कि पहले टोल प्लाजा पर वाहनों को औसतन 12 मिनट तक रुकना पड़ता था, लेकिन FASTag के आने के बाद इस समय में 80-90 प्रतिशत की कमी आई है। अब सरकार इस प्रक्रिया को और भी सरल बनाना चाहती है। प्रस्तावित प्रणाली में टोल प्लाजा पर कोई भौतिक बैरियर नहीं होगा, जिससे वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे। मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम को मार्च तक लागू करने का लक्ष्य है।
FASTag की बढ़ती लोकप्रियता
गडकरी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर FASTag की पहुंच अब 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है, और 13 करोड़ से ज्यादा FASTag जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि तेज टोलिंग से हर साल लोगों के समय की आर्थिक कीमत लगभग ₹68,500 करोड़ आंकी गई है। इसके साथ ही, सालाना लगभग 56 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होने की संभावना है, जिससे यात्रियों का समय और खर्च दोनों में कमी आएगी।
डिजिटल प्रणाली से टोल राजस्व में वृद्धि
केंद्रीय मंत्री का मानना है कि FASTag के साथ ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान तकनीक को जोड़ने से टोल वसूली में सुधार होगा। इससे सरकार को हर साल लगभग ₹10,000 करोड़ अतिरिक्त टोल राजस्व मिलने की उम्मीद है। गडकरी ने फिनटेक कंपनियों से भी डिजिटल टोलिंग के क्षेत्र में काम करने और सफल वैश्विक मॉडलों का अध्ययन कर उपयोगी सुझाव देने का आग्रह किया।
FASTag पोर्टेबिलिटी की नई सुविधा
गडकरी ने FASTag पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी शुरू की है, जिसके तहत वाहन मालिक बिना अपने मौजूदा FASTag को बदले, उसे नए बैंक खाते से लिंक कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के पास पहले से UPI, आधार और वाहन संबंधी डिजिटल जानकारी जैसी मजबूत व्यवस्थाएं हैं। अब इन्हें जोड़कर एक ऐसा डिजिटल नेटवर्क बनाने की आवश्यकता है, जिससे भविष्य में स्मार्ट और अधिक कुशल परिवहन व्यवस्था विकसित की जा सके।
