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डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन का लंदन से सांसदों को संदेश

डीएमके के प्रमुख एमके स्टालिन ने लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी सांसदों को संबोधित किया। उन्होंने महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों पर चर्चा की और सांसदों को निर्देश दिए कि किसी भी विधेयक का समर्थन या विरोध सीधे तौर पर न करें। स्टालिन का यह रुख विपक्ष के लिए एक बड़ा संदेश है, खासकर परिसीमन बिल के संदर्भ में। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
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स्टालिन का लंदन दौरा और पार्टी की नई दिशा


डीएमके के नेता एमके स्टालिन वर्तमान में लंदन में हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद, उन्होंने पार्टी की जिम्मेदारी अपने बेटे उदयनिधि स्टालिन को सौंप दी है, जो अब रोजमर्रा के कार्यों का संचालन कर रहे हैं। हालांकि, महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों में स्टालिन का मार्गदर्शन आवश्यक है। इसी कारण, उन्होंने लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पार्टी के सांसदों और नेताओं को संबोधित किया।


स्टालिन ने संसद के मानसून सत्र और प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयकों पर सांसदों को जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांसदों को किसी भी विधेयक का समर्थन या विरोध सीधे तौर पर नहीं करना है। यह संदेश कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कांग्रेस को यह भी बताया कि यदि विपक्ष किसी सरकारी विधेयक का विरोध कर रहा है, तो डीएमके हर बिल का विरोध नहीं करेगा।


दिलचस्प बात यह है कि संसद में डीएमके सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की गई है। स्टालिन के इस रुख से परिसीमन बिल को रोकने के विपक्ष के प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान इस बिल का मुद्दा भी उठाया गया। पिछले विशेष सत्र में, स्टालिन ने इस बिल का विरोध करते हुए काले कपड़े पहनकर बिल की कॉपी जलाई थी।


अब स्थिति बदल चुकी है। डीएमके के संगठन सचिव आरएस भारती ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि सरकार परिसीमन बिल पर दिए गए सुझावों को स्वीकार करती है, तो उनका विरोध करने का कोई कारण नहीं है। इसका मतलब है कि डीएमके इस विधेयक का समर्थन करने के लिए तैयार है। इससे पहले, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी कहा था कि यदि सरकार सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव लाती है, तो उनकी पार्टी इसका समर्थन करने पर विचार कर सकती है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि विपक्ष के 30 और लोकसभा सांसद इस बिल पर सरकार के साथ खड़े होने जा रहे हैं।