डोनाल्ड ट्रंप का नया टैरिफ नियम: भारत और अन्य देशों पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति का अचानक फैसला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया निर्णय ने वैश्विक व्यापार में हलचल मचा दी है। शुक्रवार रात 12:01 बजे से एक नया नियम लागू होने जा रहा है, जिसके बारे में कई अटकलें और चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। इस आदेश के बाद, पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन पर हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि क्या इस कदम से भारत की अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
टैरिफ का विवरण
ट्रंप ने भारत और 16 अन्य देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम उन वस्तुओं के उत्पादन में जबरन श्रम के उपयोग को रोकने के प्रयास के तहत उठाया गया है। पिछले महीने, जब अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत टैरिफ का प्रस्ताव रखा था, तब भारत को उन देशों में रखा गया था जिन पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाया जाना था। लेकिन वाशिंगटन ने नई दिल्ली द्वारा जबरन श्रम से बने सामान के आयात पर रोक लगाने के संशोधन को ध्यान में रखा।
ट्रंप का मेमोरेंडम
गुरुवार को ट्रंप ने इस मुद्दे पर एक मेमोरेंडम जारी किया, जिसमें कहा गया, "इन कदमों के परिणामस्वरूप, ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने मुझे सलाह दी है कि इन अर्थव्यवस्थाओं के सामान पर 10 प्रतिशत की दर से टैरिफ लगाया जाना चाहिए, ताकि उन्हें ऐसी रोक को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए और प्रोत्साहित किया जा सके।"
नए टैरिफ की घोषणा
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए टैरिफ की घोषणा की। यह घोषणा सभी देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त लेवी की समय-सीमा खत्म होने से एक दिन पहले की गई।
टैरिफ का प्रभाव
जिन देशों में जबरन श्रम से बने सामान पर रोक लगाने वाले कानून नहीं हैं, जैसे चीन, यूनाइटेड किंगडम और जापान, उन्हें 12.5 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। यह टैरिफ उन कच्चे माल पर लागू नहीं होगा जिनकी घरेलू आपूर्ति की कमी हो सकती है।
टैरिफ की समयसीमा
60 देशों में से 17 देशों पर 10 प्रतिशत की दर लागू होगी, जिनमें भारत, कनाडा, यूके, बांग्लादेश और पाकिस्तान शामिल हैं। बाकी 43 देशों को 12.5 प्रतिशत टैरिफ देना होगा।
नई टैरिफ का कार्यान्वयन
नई टैरिफ शुक्रवार रात 12:01 बजे से लागू होंगी, ठीक उसी समय जब 10 प्रतिशत का अस्थायी इंपोर्ट टैक्स खत्म हो रहा है। यह कदम फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद उठाया गया था जिसमें अप्रैल 2025 में लागू की गई "लिबरेशन डे" टैरिफ को रद्द कर दिया गया था।
मानवाधिकारों की रक्षा
ग्रीर ने कहा कि यह कदम मानवाधिकारों के उल्लंघन और व्यापार के गलत तरीकों को सुधारने की दिशा में काम करेगा, ताकि सभी जगह कामगारों का भला हो सके।
