तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने परिसीमन योजना के खिलाफ उठाई आवाज
सीएम विजय का केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा
चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और फिल्म स्टार थलपति विजय अब केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं। नीट परीक्षा और एफसीआरए (FCRA) बिल के खिलाफ आवाज उठाने के बाद, उन्होंने अब परिसीमन योजना के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा में, सीएम विजय ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि दक्षिण भारत के अधिकारों की कीमत पर मोदी सरकार को लोकसभा सीटें बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का विरोध
मुख्यमंत्री विजय ने इस प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि देश में लोकसभा सीटों की कुल संख्या को हमेशा के लिए मौजूदा 543 पर स्थिर रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण को प्रभावी ढंग से लागू किया है। 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों को 550 से बढ़ाकर 850 करना उन राज्यों के लिए एक सजा होगी जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में उत्कृष्टता दिखाई है। राज्य सरकार का मानना है कि केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों की वृद्धि से संसद में दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व और राजनीतिक ताकत कमजोर हो जाएगी, जिसे केंद्र सरकार को सुरक्षित रखना चाहिए।
महिला आरक्षण पर सीएम का स्पष्ट रुख
विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते समय, महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सीएम विजय ने अपनी सरकार का स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा 543 सीटों के आधार पर तुरंत मिलना चाहिए। इसके लिए किसी नए परिसीमन का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। विजय ने जोर देकर कहा कि तमिलनाडु में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक है। इसलिए, महिलाओं को उनका राजनीतिक अधिकार देना कोई दान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का मामला है, जिसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
केंद्र के सामने चार प्रमुख मांगें
इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव के माध्यम से, तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि देश में लोकसभा की कुल सीटें स्थायी रूप से 543 पर निर्धारित की जाएं। दूसरी मांग में कहा गया है कि राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का बंटवारा उनके मौजूदा प्रतिनिधित्व के अनुपात के आधार पर रोका जाए। इसके साथ ही, आबादी और राज्यों के बीच वर्तमान 2.2:1 के अनुपात को बनाए रखा जाए। चौथी मांग में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की शर्त से मुक्त करते हुए 2029 के चुनावों में मौजूदा 543 सीटों पर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
परिसीमन बिल का संसद में अटकना
यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्र सरकार ने इसी वर्ष 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर संविधान का 131वां संशोधन विधेयक (2026) लोकसभा में पेश किया था। इसका मुख्य उद्देश्य संसद में लोकसभा सदस्यों की संख्या को बढ़ाकर 850 करना और 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करना था। हालांकि, उस समय सरकार को बड़ा झटका लगा क्योंकि इस विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई विशेष बहुमत नहीं मिल सका। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध करते हुए मांग की थी कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करके लागू किया जाए, और अब थलपति विजय के इस कदम ने विपक्ष की मांग को और मजबूती दी है।
