तिब्बती बच्चों की सैन्य गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना
इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (ICT) ने हाल ही में तिब्बत के किंडरगार्टन के बच्चों की सैन्य गतिविधियों की कड़ी आलोचना की है। तस्वीरों में बच्चे कैमोफ्लाज यूनिफॉर्म में दिख रहे हैं, जो नकली राइफलें लेकर युद्धाभ्यास कर रहे हैं। ICT ने इसे बच्चों के लिए अनुपयुक्त बताते हुए चिंता जताई है कि यह केवल सैन्यीकरण नहीं, बल्कि तिब्बती सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास भी है। संगठन ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे इस मुद्दे को उठाएँ और तिब्बती बच्चों की सुरक्षा के लिए दबाव डालें।
| Jun 12, 2026, 18:41 IST
तिब्बती बच्चों की सैन्य गतिविधियों की आलोचना
'इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत' (ICT) ने चीनी अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। हाल ही में सामने आई तस्वीरों में तिब्बत के किंडरगार्टन के बच्चों को सैन्य शैली की गतिविधियों में भाग लेते हुए देखा गया। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट' द्वारा जारी की गई इन तस्वीरों में छोटे बच्चे कैमोफ्लाज यूनिफॉर्म पहने, चीनी झंडे के नीचे मार्च करते और नकली राइफलें लेकर युद्धाभ्यास (mock combat drills) में भाग लेते हुए नजर आ रहे हैं। ये तस्वीरें दक्षिणी तिब्बत के सोना (Tsona) शहर में खींची गई थीं, जो भारत के निकट स्थित है। इन्हें 26 मई, 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दिखाया गया था। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, ये गतिविधियां "राष्ट्रीय रक्षा और जातीय एकता" से संबंधित शैक्षिक कार्यक्रमों के तहत आयोजित की गई थीं। इनका उद्देश्य छोटे बच्चों में देशभक्ति और सीमा सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना था。
ICT की निंदा और चिंताएँ
ICT ने इस पहल की निंदा करते हुए कहा कि ये दृश्य अत्यंत चिंताजनक हैं और किंडरगार्टन के बच्चों के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं हैं। संगठन का मानना है कि किसी भी बच्चे को शिक्षा के माहौल में सैन्य प्रशिक्षण नहीं दिया जाना चाहिए और न ही उन्हें युद्ध जैसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य कम्युनिस्ट पार्टी, चीनी सरकार और स्थानीय समुदायों के प्रति वफादारी बढ़ाना है, साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। चीनी अधिकारियों ने इन गतिविधियों को जातीय एकता को मजबूत करने और कम उम्र से ही राष्ट्रीय रक्षा शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा बताया है।
वैचारिक अभियानों की चिंता
हालांकि, ICT का कहना है कि यह मामला केवल सैन्यीकरण तक सीमित नहीं है। संगठन ने बताया कि तिब्बती बच्चों को लगातार ऐसे वैचारिक अभियानों का हिस्सा बनाया जा रहा है जो सरकारी नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं और तिब्बती सांस्कृतिक पहचान और विरासत को कमजोर करते हैं। संगठन ने यह भी कहा कि ऐसी गतिविधियाँ विशेष रूप से सोना (Tsona) जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में चिंता का विषय हैं, जहाँ भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
सरकारों से अपील
इन घटनाओं को तिब्बत में बीजिंग की नीतियों का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए, ICT ने विश्वभर की सरकारों, व्यवसायों और नागरिक समाज समूहों से अपील की है कि वे चीनी अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को उठाएँ और तिब्बती बच्चों और संस्कृति की बेहतर सुरक्षा के लिए दबाव डालें।
