थलपति विजय का विधानसभा भाषण: विवाद और स्पष्टीकरण
तमिलनाडु में थलपति विजय का भाषण बना चर्चा का विषय
तमिलनाडु की राजनीतिक परिदृश्य में अभिनेता से नेता बने थलपति विजय का विधानसभा में दिया गया भाषण चर्चा का केंद्र बन गया है। उन्होंने डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए एक इशारे को लेकर विवाद खड़ा कर दिया। आलोचनाओं के बीच विजय ने स्पष्ट किया कि उनका हावभाव जानबूझकर नहीं था।
विधानसभा में भाषण के दौरान विवाद की शुरुआत
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब थलपति विजय ने विधानसभा में पुलिस विभाग के अनुदान पर चर्चा करते हुए सरकार पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने डीएमके की 'मिस्टर क्लीन' छवि पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। विजय ने ईडी के दस्तावेजों और सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन को भी निशाने पर लिया। उनका आरोप था कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के ठेकेदारों से पार्टी फंड के नाम पर कमीशन लिया गया।
एक इशारे ने बढ़ाया राजनीतिक विवाद
विजय के भाषण के दौरान एक विशेष हावभाव ने विवाद को और बढ़ा दिया। मीसा कानून का जिक्र करते हुए उन्होंने अपना दाहिना हाथ जबड़े के पास रखा, जिसे एमके स्टालिन की पुरानी चोट से जोड़ा गया। माकपा नेता पी. शनमुगम ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इमरजेंसी के दौरान पुलिस कार्रवाई में स्टालिन का जबड़ा टूट गया था। उन्होंने विजय के हावभाव को अनुचित बताते हुए विधानसभा में व्यक्तिगत हमलों से बचने की सलाह दी।
डीएमके विधायकों का विरोध
विजय के आरोपों के बाद विधानसभा में डीएमके विधायकों ने जोरदार विरोध किया। उदयनिधि स्टालिन के नेतृत्व में पार्टी के विधायक सदन से बाहर चले गए। डीएमके ने विजय की मीसा से जुड़ी टिप्पणियों को विधानसभा की कार्यवाही से हटाने की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि विजय ने ऐसे मुद्दों का उल्लेख किया है जिन पर पहले भी चर्चा हो चुकी है।
विजय का स्पष्टीकरण
विवाद के बढ़ने के बाद थलपति विजय ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि 7 सितंबर को पुलिस विभाग की अनुदान मांग पर जवाब देते समय उनका शारीरिक हावभाव जानबूझकर नहीं था। विजय ने कहा कि इसे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के प्रयास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का अपमान करना नहीं था।
