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दिल्ली पुलिस की प्रदर्शन पर रोकने की अपील: क्या यह लोकतंत्र के खिलाफ है?

दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के लिए लोगों से न जाने की अपील की है, citing कानून व्यवस्था की चिंताओं। यह कदम तब उठाया गया जब कॉकरोच जनता पार्टी और वामपंथी छात्र संगठनों ने प्रदर्शन का ऐलान किया। पुलिस का कहना है कि जंतर मंतर पर धारा 144 लागू है, जिससे पांच या अधिक लोगों का एकत्र होना मना है। इस स्थिति ने लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल उठाए हैं। क्या पुलिस को इस तरह की अपील करने का अधिकार है? जानें इस मुद्दे पर और क्या बहस चल रही है।
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दिल्ली पुलिस की नई अपील

दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक अनोखी अपील की है, जिसमें नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए न जाएं। यह कदम कानून व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। पुलिस ने बताया कि जंतर मंतर पर धारा 144 लागू है, जिसका मतलब है कि वहां पांच या उससे अधिक लोग एकत्रित नहीं हो सकते। इस स्थिति में, पुलिस का यह सवाल उठता है कि क्या लोकतांत्रिक प्रदर्शन में भाग लेने से लोगों को रोकने की अनुमति है?


दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और वामपंथी छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन का आयोजन करने का निर्णय लिया है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने 7 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस प्रदर्शन की जानकारी दी और देशभर के लोगों से जंतर मंतर पहुंचने की अपील की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर यह प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया। जैसे ही सीजेपी और वामपंथी नेताओं ने अपनी अपील की, दिल्ली पुलिस ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए प्रदर्शन के लिए जंतर मंतर न जाने की सलाह दी। इस अपील ने दिल्ली पुलिस की भूमिका पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।