दिल्ली में छात्र आंदोलन: सोशल मीडिया पर बढ़ते ब्लॉकिंग ऑर्डर की चौंकाने वाली रिपोर्ट
दिल्ली में छात्र आंदोलन का प्रभाव
राजनीतिक समाचार: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रहा है। इस आंदोलन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। सोशल मीडिया ने इस छात्र आंदोलन को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं, जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार ने मार्च से जुलाई के बीच हर मिनट सोशल मीडिया कंपनियों को एक ब्लॉकिंग ऑर्डर भेजा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
एक प्रमुख समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, औसतन हर 68 सेकंड में एक ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी किया गया। प्रतिदिन लगभग 1,275 ऑर्डर भेजे गए, जिससे पांच महीनों में कुल 1.95 लाख ऑर्डर बनते हैं। इस दौरान, इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर कंटेंट पर रोक लगाने के लिए सरकार के निर्देशों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। यह ध्यान देने योग्य है कि इस समय दिल्ली में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का विरोध भी चल रहा था। रिपोर्ट में सरकारी आंतरिक डेटा का उल्लेख किया गया है, जिसमें हर ब्लॉकिंग ऑर्डर में कई कंटेंट या अकाउंट शामिल हो सकते हैं।
अंग्रेजी समाचार पत्र के अनुसार, मार्च से जुलाई के बीच इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को कंटेंट पर रोक लगाने के लिए भेजे गए निर्देशों में भारी वृद्धि हुई है। पिछले साल के RTI रिकॉर्ड से पता चलता है कि अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच, 'सहयोग' पोर्टल के माध्यम से 19 ऑनलाइन प्लेटफार्मों को कुल 2,312 ब्लॉकिंग ऑर्डर भेजे गए थे, जो कि प्रतिदिन औसतन छह ऑर्डर बनाते हैं।
हालांकि महीने-दर-महीने का ब्योरा उपलब्ध नहीं है, लेकिन एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान जारी किए गए ब्लॉकिंग आदेशों की संख्या काफी अधिक थी, विशेषकर इंस्टाग्राम पर। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इंस्टाग्राम को इन निर्देशों का सबसे बड़ा हिस्सा मिला; पांच महीने की अवधि में इसे लगभग 1 लाख आदेश प्राप्त हुए, जो कुल आदेशों का आधे से अधिक है।
समाचार पत्र ने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित तीन घंटे के भीतर कंटेंट हटाने की समय सीमा का पालन करने के लिए, मेटा ने अपने API को 'सहयोग' पोर्टल के साथ जोड़ा है। इससे सरकारी निर्देशों के तहत अपलोड किए गए और चिह्नित किए गए कंटेंट को कंपनी द्वारा मानव समीक्षा के बिना अपने-आप हटाया जा सकता है।
इस रिपोर्ट को साझा करते हुए कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर लिखा, 'हर मिनट सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को 1 ब्लॉकिंग ऑर्डर... 2024-25 में 2,312 ब्लॉकिंग ऑर्डर... मार्च-जुलाई 2026 में 1,95,000 ब्लॉकिंग ऑर्डर... इनमें से आधे से अधिक ब्लॉकिंग ऑर्डर युवाओं के प्लेटफॉर्म - इंस्टाग्राम - के लिए थे। यह दर्शाता है कि मोदी 'जेन ज़ी' (Gen Z) से कितने डरे हुए हैं - इसलिए वे उनकी आवाज़ दबाते हैं!'
