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दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और पर्यावरण पर चर्चा

दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। सम्मेलन में 11 सदस्य देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 'दिल्ली घोषणा पत्र' में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया और टेरर फंडिंग पर प्रतिबंध लगाने पर सहमति बनी। इसके अलावा, वैश्विक मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और पर्यावरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जानें इस सम्मेलन की प्रमुख बातें और भारत की कूटनीतिक जीत।
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन


दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का दो दिवसीय कार्यक्रम एक साझा और उज्ज्वल भविष्य के लिए संकल्प के साथ समाप्त हुआ। इस मंच पर 11 सदस्य देशों, 12 सहयोगी देशों और संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित 5 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो दुनिया की आधी जनसंख्या और 40 प्रतिशत से अधिक वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं।


आतंकवाद पर कड़ा रुख और 'दिल्ली घोषणा पत्र'

सम्मेलन के बाद जारी 'दिल्ली घोषणा पत्र' में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया। पहलगाम हमले का उल्लेख करते हुए, टेरर फंडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर सहमति बनी। चीन ने भी इस पर हस्ताक्षर किए, जिसे भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। इसके अलावा, एकतरफा सैन्य कार्रवाई और व्यापारिक जहाजों के वैश्विक मार्गों को प्रभावित करने वाली संघर्षों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया गया।


आर्थिक सहयोग और वैश्विक मूल्य श्रृंखला

ग्लोबल वैल्यू चेन (2026-2030) के तहत, सदस्य देशों ने अपने बाजारों को एक-दूसरे के लिए खोलने और आपसी सहयोग को बढ़ाने का निर्णय लिया। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिना सोचे-समझे एकतरफा टैरिफ लगाने पर चिंता व्यक्त की गई। चीन ने व्यापार, मुद्रा, डेटा और कौशल साझा करने को अधिक लचीला बनाने पर सहमति दी।


पर्यावरण निगरानी और UNSC सुधार

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन समझौते को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की संरचना में तात्कालिक सुधार करने और इसमें 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की भागीदारी बढ़ाने की मांग को मजबूती से दोहराया गया। वैश्विक तनाव के बीच, भारत ने शांति और आर्थिक स्थिरता का प्रभावी संदेश दिया।