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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों में एबीवीपी की जीत, एनएसयूआई को मिली निराशा

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों में एबीवीपी ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जिसमें यश डबास ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। एनएसयूआई को निराशा का सामना करना पड़ा, जबकि निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एबीवीपी को बधाई दी, यह कहते हुए कि यह जीत राष्ट्र विरोधी ताकतों के लिए एक स्पष्ट संदेश है। जानें इस चुनाव के परिणामों के पीछे की पूरी कहानी।
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डूसू चुनावों में एबीवीपी की सफलता


नई दिल्ली में जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनावों पर सभी की नजरें थीं। शनिवार को घोषित परिणामों में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने तीन सीटों पर जीत हासिल की। एबीवीपी के यश डबास ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को कोई सीट नहीं मिली। लेफ्ट का गठबंधन भी इस बार सफल नहीं रहा।


यश डबास ने एनएसयूआई के जितेंद्र कुमार मीणा को लगभग दो हजार वोटों से हराया। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने एक नया रिकॉर्ड बनाया, जो 17 साल बाद डूसू के सेंट्रल पैनल में किसी निर्दलीय की जीत है। शौकीन को 30,000 से अधिक वोट मिले। एनएसयूआई से टिकट न मिलने के कारण उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। इससे पहले 2009 में मनोज चौधरी और 1991 में राजीव गोस्वामी ने निर्दलीय के रूप में डूसू के अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी।


एबीवीपी की रिया छावड़ी ने सचिव पद और लक्ष्यराज सिंह ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की। डूसू चुनाव के लिए शुक्रवार को 52 कॉलेजों में मतदान हुआ, जिसमें 40.46 प्रतिशत वोटिंग हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय के 1,51,519 छात्रों में से 61,312 ने मतदान किया।


चुनाव परिणामों के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एबीवीपी को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'दिल्ली विश्वविद्यालय केवल एक यूनिवर्सिटी नहीं है, यहां देश के हर कोने से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। यहां का जनादेश पूरे भारत के युवाओं के मन का प्रतिबिंब होता है। आज एबीवीपी को मिली शानदार जीत उन राष्ट्र विरोधी ताकतों के लिए स्पष्ट संदेश है, जो युवा शक्ति को राष्ट्रविरोधी एजेंडे की प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं। देश का युवा आज राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ा है और यही इस जनादेश का सबसे बड़ा संदेश है।'