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नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन: घोषणापत्र और वैश्विक चुनौतियाँ

नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में महत्वपूर्ण घोषणापत्र को मंजूरी दी गई, जिसमें आतंकवाद, UNSC सुधार और ग्लोबल साउथ की भागीदारी पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। BRICS की स्थापना, इसके सदस्यों की विविधता और पश्चिमी देशों की चिंताओं पर भी चर्चा की गई। जानें इस सम्मेलन की प्रमुख बातें और वैश्विक चुनौतियाँ।
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नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन का घोषणापत्र


शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में घोषणापत्र को स्वीकृति दी गई। इस दस्तावेज़ में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई, साथ ही UNSC सुधार और ग्लोबल साउथ की भागीदारी पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन घोषणाओं को लागू करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।


BRICS का परिचय

BRICS की शुरुआत BRIC के नाम से हुई थी, जिसे अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने 2001 में प्रस्तुत किया था। 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने एक साथ आकर पहला शिखर सम्मेलन 2009 में आयोजित किया। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से यह BRICS बन गया। जनवरी 2025 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE के शामिल होने से इसका विस्तार होगा। बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम भी सहयोगी देश बन चुके हैं।


BRICS के सामने चुनौतियाँ

इस समूह में विभिन्न मुद्दों पर मतभेद हैं। रूस, चीन और ईरान BRICS को पश्चिमी शक्तियों के खिलाफ एक मजबूत मंच के रूप में देखना चाहते हैं और डॉलर पर निर्भरता को कम करना चाहते हैं। दूसरी ओर, UAE और सऊदी अरब अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं और ईरान के साथ उनके क्षेत्रीय मतभेद हैं। चीन की आर्थिक ताकत के कारण, भारत और ब्राजील चाहते हैं कि समूह केवल बीजिंग की प्राथमिकताओं तक सीमित न रहे। भारत-चीन सीमा विवाद भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।


पश्चिमी देशों की BRICS के प्रति राय

अमेरिका में BRICS को लेकर चिंता बनी हुई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे अमेरिका-विरोधी समूह के रूप में वर्णित कर चुके हैं और डॉलर को कमजोर करने के प्रयासों पर 100% टैरिफ की चेतावनी दी थी। हालांकि, BRICS देश यह स्पष्ट करते हैं कि यह किसी देश के खिलाफ नहीं है। मोदी ने भी कहा कि ग्लोबल साउथ को वैश्विक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका मिलनी चाहिए। भारत 12-13 सितंबर को शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है, जिसमें 11 सदस्य और 10 सहयोगी देशों के नेता शामिल होंगे।