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नरेंद्र मोदी के शासन पर युवा पीढ़ी की तीखी प्रतिक्रिया

20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर युवा प्रदर्शन में नरेंद्र मोदी के खिलाफ तीखी गालियाँ सुनाई दीं। यह घटना स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक अनोखी स्थिति को दर्शाती है, जहाँ युवा पीढ़ी मोदी के शासन को दुष्ट मानते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त कर रही है। इस लेख में जानें कि कैसे पिछले 12 वर्षों में मोदी की छवि नकारात्मक होती गई है और युवा अब उन्हें ठग मानते हैं।
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जंतर-मंतर पर युवा प्रदर्शन


स्वतंत्र भारत के इतिहास में नरेंद्र मोदी जैसे प्रधानमंत्री को इतनी नकारात्मकता का सामना नहीं करना पड़ा। 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर एक प्रौढ़ महिला ने कहा, 'भारत ने बुरी सरकारें देखी हैं, लेकिन ऐसी दुष्ट सरकार कभी नहीं।' यह वाक्य मोदी के शासन की सच्चाई को दर्शाता है। पिछले 12 वर्षों में मोदी के झूठ और समाज में विभाजन की बातें लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ गई हैं।


क्या इंदिरा गांधी या मनमोहन सिंह के समय में ऐसा कुछ हुआ था? मैंने 12 प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल को पत्रकार के रूप में देखा है। 1977 में इंदिरा गांधी की हार के बाद जनता का जोश देखने को मिला था, लेकिन आज जंतर-मंतर पर युवा मोदी के खिलाफ गालियाँ दे रहे हैं।


2011-12 में मनमोहन सिंह के खिलाफ भी नारे लगे थे, लेकिन उस समय उन्हें इस तरह की गालियाँ नहीं दी गईं। अब वही युवा, जो 2014 में मोदी को भगवान मानते थे, आज उन्हें अपशब्द कह रहे हैं।


वैश्विक स्तर पर भी नेताओं को गालियाँ मिली हैं, लेकिन मोदी का मामला अलग है। अब युवा उन्हें ठग मानते हैं। जंतर-मंतर पर युवा अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं, और यह एक अनोखी स्थिति है।


यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि सभी युवा केवल एक व्यक्ति नरेंद्र मोदी को निशाना बना रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया में भले ही कुछ भी हो, लेकिन मोदी की छवि अब नकारात्मक होती जा रही है।