नेतन्याहू की मुश्किलें: अमेरिका-तुर्की संबंधों में बदलाव का खतरा
इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इन दिनों अमेरिका-तुर्की संबंधों में बदलाव के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुर्की यात्रा और संभावित F35 सौदों के चलते इसराइल की हवाई शक्ति को खतरा हो सकता है। जानें कैसे ये घटनाएँ इसराइल की कूटनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं और क्या ट्रंप एर्दोगान को संतुष्ट करने के लिए कुछ खास करेंगे।
| Jul 7, 2026, 13:10 IST
नेतन्याहू की चिंताएँ बढ़ी
अमेरिका के साथ अपने गहरे संबंधों के लिए जाने जाने वाले इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इन दिनों गंभीर संकट में हैं। तुर्की के साथ बढ़ते तनाव के बीच, उन्हें इस बात का डर है कि उनकी हवाई शक्ति कमजोर हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तुर्की के अंकारा की यात्रा पर निकल चुके हैं। 7 जुलाई को जब वे वहां पहुंचेंगे, तो नेतन्याहू को चिंता है कि ट्रंप की कार्रवाई इसराइल के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। यदि ट्रंप ने एर्दोगान से मिलने के बाद कुछ ऐसा किया, तो इससे इसराइल की स्थिति कमजोर हो सकती है। वाशिंगटन से संकेत मिल रहे हैं कि तुर्की को F35 स्टेल्थ फाइटर जेट दिए जा सकते हैं। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने पहले ही कांग्रेस को सूचित किया है कि तुर्की को 700 मिलियन डॉलर के अत्याधुनिक जनरल इलेक्ट्रिक इंजन दिए जाएंगे।
तुर्की को मिल सकता है F35 प्रोग्राम
तुर्की इन इंजनों का उपयोग अपने स्वदेशी पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए करने की योजना बना रहा है। ट्रंप ने यात्रा से पहले स्पष्ट किया है कि वे एर्दोगान के लिए कुछ ऐसा करने जा रहे हैं जिससे तुर्की को खुशी मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तुर्की को F35 प्रोग्राम में फिर से शामिल किया गया, तो इससे इसराइल की हवाई श्रेष्ठता को खतरा होगा। इसराइल को चिंता है कि तुर्की के पास यह नई तकनीक आने से क्षेत्र में रक्षा संतुलन बदल जाएगा। इसके अलावा, वाशिंगटन में नई नेतृत्व की नीति भी इसराइल के लिए चुनौती बन गई है।
अमेरिका की नई नीति
हाल ही में, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसराइल के प्रति एक कड़ा रुख अपनाया है, जिससे इसराइल की स्थिति और भी कमजोर हुई है। वेंस के बयानों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका अब बिना शर्त इसराइल के हर संघर्ष की जिम्मेदारी नहीं लेगा। अमेरिका के लिए अब राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। नेतन्याहू और एर्दोगान के बीच हाल की जुबानी जंग ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है।
तुर्की की चेतावनी
एर्दोगान ने इसराइल को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अपनी सीमाओं पर ताकत के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं करेंगे। नेतन्याहू ने ट्रंप से गुहार लगाई है कि तुर्की को हथियार न दिए जाएं, लेकिन अमेरिका ने इसराइल की इस अपील को नजरअंदाज कर दिया है। यह स्थिति दर्शाती है कि वैश्विक राजनीति में बदलाव आ रहा है।
भविष्य की अनिश्चितता
इसराइल की शक्ति अब कमजोर हो चुकी है, जिसके बल पर वह अमेरिका को प्रभावित करता था। ट्रंप द्वारा तुर्की को F35 देने की संभावनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अब इसराइल की इच्छाओं को प्राथमिकता नहीं देगा। नेतन्याहू की कूटनीतिक हार इसराइल के लिए भविष्य में क्या परिणाम लाएगी, यह एक बड़ा सवाल है। अब देखना है कि ट्रंप एर्दोगान से मुलाकात के बाद उन्हें कौन सा उपहार देते हैं जिससे एर्दोगान संतुष्ट होंगे।
