Newzfatafatlogo

नेपाल दौरे पर विक्रम मिसरी, पीएम शाह की भारत यात्रा की तैयारी

विदेश सचिव विक्रम मिसरी नेपाल की यात्रा पर हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की संभावित भारत यात्रा की तैयारी करना है। यह यात्रा मार्च में पदभार ग्रहण करने के बाद मिसरी की पहली पड़ोसी देश की यात्रा होगी। इस दौरान द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से नेपाल-भारत संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। हाल ही में सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के बीच कुछ असहजता उत्पन्न हुई है। जानें इस यात्रा के महत्व और संभावित परिणामों के बारे में।
 | 

नेपाल में विक्रम मिसरी का दौरा

(शिरीष बी प्रधान) काठमांडू, तीन नवंबर: विदेश सचिव विक्रम मिसरी बुधवार को नेपाल की यात्रा पर पहुंचेंगे, जो दो दिन चलेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की संभावित भारत यात्रा की तैयारी करना है, जो नवंबर के अंतिम सप्ताह में होने की संभावना है।


पहली यात्रा का महत्व

यह यात्रा मार्च में पदभार ग्रहण करने के बाद मिसरी की किसी पड़ोसी देश की पहली यात्रा होगी। काठमांडू स्थित विदेश मंत्रालय ने बताया कि मिसरी नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के निमंत्रण पर चार और पांच नवंबर को नेपाल आएंगे।


द्विपक्षीय वार्ता

मिसरी इस यात्रा के दौरान अपने नेपाली समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष नेपाल-भारत संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, ताकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंधों को और मजबूत किया जा सके।


प्रधानमंत्री शाह से संभावित मुलाकात

एक अधिकारी ने बताया कि मिसरी अपनी नेपाल यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शाह से भी मुलाकात कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, नेपाल और भारत के विदेश मंत्रालय प्रधानमंत्री शाह की आगामी भारत यात्रा की तैयारी कर रहे हैं।


भारत-नेपाल संबंधों में जटिलताएँ

दोनों देशों के नेताओं ने अक्सर उनके बीच के सदियों पुराने 'रोटी-बेटी' संबंधों का उल्लेख किया है। हाल ही में, भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद को लेकर कुछ असहजता उत्पन्न हुई थी, जब शाह ने चीन और ब्रिटेन को शामिल करने की मांग की थी। भारत ने स्पष्ट रूप से किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया है।


सीमा विवाद

भारत का मानना है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए एक स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है।