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नेहा बोरा ने हाई कोर्ट में पुलिस के बॉन्ड आदेश को दी चुनौती

सीपीआई एमएल की अध्यक्ष नेहा बोरा ने पुलिस द्वारा जमानत के लिए बॉंड भरने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें रिहा किया गया। इस मामले में नेहा ने जल्द सुनवाई की अपील की है, जबकि अन्य गिरफ्तार व्यक्तियों को भी इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और नेहा की कानूनी लड़ाई के बारे में।
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नेहा बोरा की कानूनी लड़ाई


नई दिल्ली। सीपीआई एमएल के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष, नेहा बोरा ने पुलिस द्वारा जमानत के लिए बॉंड भरने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। नेहा बोरा 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च में शामिल हुई थीं, जहां उन्हें हिरासत में लिया गया। उन्हें शनिवार की सुबह पांच बजे रिहा किया गया, लेकिन इससे पहले उन्हें शांति बनाए रखने के लिए एक बॉंड भरने के लिए कहा गया।


इससे पहले, 11 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को भी इसी तरह के बॉंड भरने के बाद हिरासत से रिहा किया गया था। इन तीनों को 10 अक्टूबर को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से गिरफ्तार किया गया था। बाद में, बॉंड की शर्तों का उल्लंघन करने के कारण सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर से हिरासत में लिया गया, और वे छह दिन से जेल में हैं।


नेहा बोरा ने पुलिस की इस कार्रवाई को चुनौती देने का निर्णय लिया है। कहा जा रहा है कि वे इस मामले में हाई कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग कर सकती हैं, हालांकि दशहरा के कारण इस सप्ताह हाई कोर्ट में छुट्टी है। बॉंड को चुनौती देने के लिए वे सोमवार को अदालत पहुंचीं।