पंजाब CMO भ्रष्टाचार मामले में हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय, CBI को सौंपी जांच
पंजाब CMO भ्रष्टाचार मामला
पंजाब CMO भ्रष्टाचार मामला: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अदालत ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्णय लिया है। न्यायालय ने CBI को निर्देश दिया है कि वह मामले की जांच कर दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह कार्रवाई उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हुई, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पंजाब पुलिस को भेजे गए पत्रों और पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई न किए जाने का उल्लेख था।
इस मामले में आरोप ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी नीतियों में अनियमितताएं, टेंडर, भूमि उपयोग में बदलाव (CLU) और सरकारी कार्यों में भ्रष्टाचार से संबंधित हैं। ED ने अपनी जांच के दौरान प्राप्त डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर पंजाब पुलिस से FIR दर्ज करने और मामले की जांच करने का अनुरोध किया था। ED ने पंजाब के DGP को 30 जुलाई और 7 अगस्त 2026 को पत्र भेजे थे। इसके बाद 31 अगस्त को एजेंसी ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई और पहले साझा की गई सामग्री के साथ चैट, स्क्रीनशॉट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध कराए। ED का कहना है कि उसके पास उपलब्ध सामग्री से संज्ञेय अपराधों की आशंका है और FIR दर्ज कर आगे की जांच की जानी चाहिए।
CMO से जुड़े व्यक्तियों पर आरोप
ED ने अदालत में कहा कि कुछ निजी व्यक्ति सरकारी अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे। नितिन गोहल नामक व्यक्ति का उल्लेख किया गया है, जो सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और अन्य सरकारी कार्यों से जुड़े लोगों के बीच संपर्क का कार्य करता था। जांच एजेंसी ने पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD राजबीर घुमन का भी जिक्र किया है। ED ने अदालत में यह भी कहा कि जांच के दौरान सरकारी दस्तावेजों, ट्रांसफर सूचियों और अन्य संवेदनशील सूचनाओं के लीक या उपयोग से संबंधित सामग्री सामने आई है। एजेंसी ने CLU और सरकारी मंजूरियों से जुड़े मामलों की भी जांच का हवाला दिया है।
200 पन्नों की रिपोर्ट में क्या जानकारी है?
सितंबर में ED ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में लगभग 200 पन्नों का जवाब प्रस्तुत किया था, जिसमें बड़ी संख्या में WhatsApp चैट और अन्य सामग्री शामिल थी। ED ने इसी आधार पर पंजाब पुलिस से FIR दर्ज करने की मांग की थी। यह पूरा विवाद एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच से भी जुड़ा बताया गया है। ED की कार्रवाई उन तलाशी अभियानों के बाद आगे बढ़ी, जिनमें भूमि और CLU से जुड़े लेनदेन की जांच की जा रही थी। इसी जांच के दौरान सरकारी फैसलों और मध्यस्थों की भूमिका से संबंधित जानकारी सामने आई।
पंजाब सरकार का रुख
इस मामले में पंजाब सरकार ने ED के आरोपों और CBI जांच की मांग का विरोध किया था। सितंबर में राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि FIR दर्ज करने से पहले ED को ठोस और उपयोगी साक्ष्य उपलब्ध कराने चाहिए। सरकार ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित होने का आरोप भी लगाया था। अब हाईकोर्ट द्वारा जांच CBI को सौंपे जाने से राज्य पुलिस की भूमिका पीछे हो गई है और केंद्रीय एजेंसी को आरोपों की स्वतंत्र जांच करनी होगी। अदालत ने जांच पूरी कर दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
