पंजाब कला परिषद ने पूर्व सांसद तरलोचन सिंह को 'गुरमति रतन' पुरस्कार से सम्मानित किया
गुरमति रतन पुरस्कार का आयोजन
चंडीगढ़: पंजाब कला परिषद ने पद्म श्री डॉ. रतन सिंह जग्गी मेमोरियल चैरिटेबल फाउंडेशन के सहयोग से पहला 'गुरमति रतन' पुरस्कार पूर्व सांसद सरदार तरलोचन सिंह को प्रदान किया है। इस पुरस्कार के तहत उन्हें 51,000 रुपये, एक दुशाला और एक स्मारक चिह्न दिया गया। पुरस्कार की जूरी में डॉ. बलकार सिंह, डॉ. नविद्दता सिंह, डॉ. आतम रंधावा और श्री मलविंदर सिंह जग्गी शामिल थे। सरदार तरलोचन सिंह ने गुरमति सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पंजाब कला परिषद के ओपन एयर थिएटर का नवीनीकरण भी इस ट्रस्ट द्वारा डॉ. मलविंदर सिंह जग्गी द्वारा किया जा रहा है। यह पुरस्कार हर वर्ष गुरमति सिद्धांतों के क्षेत्र में किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को दिया जाएगा।
तरलोचन सिंह का योगदान
पूर्व सांसद तरलोचन सिंह एक सम्मानित सिख नेता, समाजसेवी और शिक्षाप्रेमी थे। उन्होंने 2004 से 2010 तक राज्यसभा में सेवा दी और इससे पहले राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा, धार्मिक सद्भाव और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण के कारण उन्हें देशभर में एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता था।
डॉ. रतन सिंह जग्गी का साहित्यिक योगदान
प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रतन सिंह जग्गी को पंजाबी-हिंदी और गुरमति एवं भक्ति आंदोलन साहित्य के क्षेत्र में एक प्रमुख विद्वान माना जाता है। उन्होंने मध्यकालीन साहित्य का गहन अध्ययन किया और सिख गुरु साहिबान की बाणी पर शोध किया। उनके प्रमुख कार्यों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब और श्री दशम ग्रंथ साहिब की व्याख्या, गुरु नानक बाणी की व्याख्या, और लगभग 150 पुस्तकों का लेखन शामिल है। उन्हें 2023 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा 'पद्म श्री' सम्मान से नवाजा गया।
साहित्य में डॉ. जग्गी का योगदान
डॉ. रतन सिंह जग्गी का साहित्य के क्षेत्र में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी सेवाएँ मानवता की विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेंगी।
