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पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी: चुनावी तैयारियों पर संकट

पंजाब में विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी और आंतरिक संघर्ष ने गंभीर रूप ले लिया है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में मतभेदों के चलते चुनावी तैयारियों पर संकट मंडरा रहा है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाने के मुद्दे पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच मतभेद हैं। चन्नी गुट की नाराजगी और शक्ति प्रदर्शन ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। जानें इस राजनीतिक उठापटक के पीछे की पूरी कहानी।
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पंजाब में कांग्रेस की अंदरूनी कलह

जालंधर: पंजाब में विधानसभा चुनावों में अब केवल 7 महीने बचे हैं, लेकिन इससे पहले कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी और आंतरिक संघर्ष अपने चरम पर पहुंच गया है। इस स्थिति ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में भी मतभेदों को उजागर कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाने के मुद्दे पर राहुल गांधी की टीम और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की राय में स्पष्ट अंतर है। इस राजनीतिक खींचतान ने पंजाब में कांग्रेस की चुनावी तैयारियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।


खड़गे और वेणुगोपाल के बीच मतभेद

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल राजा वड़िंग को हटाने के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह का बदलाव पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी ओर, मल्लिकार्जुन खड़गे बड़े संगठनात्मक बदलाव के पक्ष में हैं। इस मुद्दे पर खड़गे और वेणुगोपाल के बीच एक घंटे की बैठक भी हुई। इसके बाद खड़गे ने बघेल को दिल्ली बुलाकर पंजाब की स्थिति पर चर्चा की। हालांकि, बघेल को वापस छत्तीसगढ़ भेज दिया गया।


चन्नी गुट की नाराजगी

पंजाब में कांग्रेस के संकट का एक बड़ा कारण पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनका गुट है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी और खड़गे दोनों ही चन्नी के गुट से नाराज हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चन्नी से मिलने से भी कतराने लगा है। आलाकमान का अंतिम निर्णय केसी वेणुगोपाल के माध्यम से पंजाब कांग्रेस के सांसदों को सूचित किया जाएगा। राहुल गांधी किसी भी समय इस मामले में कठोर निर्णय ले सकते हैं।


बाजवा की दिल्ली यात्रा

इस घटनाक्रम के बीच, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा को अचानक दिल्ली बुलाया गया। वहां उनकी केसी वेणुगोपाल से महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद अटकलें तेज हो गईं कि वड़िंग से इस्तीफा लेकर बाजवा को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है। हालांकि, दिल्ली से लौटते ही बाजवा ने चन्नी से मुलाकात की, जिससे यह संकेत मिलता है कि दिल्ली ने चन्नी को कड़ा संदेश भेजा है।


चन्नी गुट का शक्ति प्रदर्शन

चन्नी गुट भी चुप नहीं बैठा है। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान को चुनौती देने का मन बना लिया है। चन्नी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर ‘सारा पंजाब चन्नी दे नाल’ मुहिम शुरू की है। हालांकि, पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया है कि पंजाब में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह 'गुड्डे-गुड्डी का खेल' नहीं है और अपनी विस्तृत रिपोर्ट केसी वेणुगोपाल को सौंप दी है।