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पंजाब कांग्रेस में बढ़ी खींचतान, राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हो पाई

पंजाब कांग्रेस में चल रही खींचतान के बीच पार्टी हाईकमान ने हस्तक्षेप किया है। नाराज नेताओं की बैठक राहुल गांधी से नहीं हो पाई, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। चन्नी गुट की मांग है कि उन्हें सीएम का चेहरा बनाया जाए, जबकि पार्टी हाईकमान ने चुनाव राहुल गांधी के चेहरे पर लड़ने का निर्णय लिया है। जानें इस राजनीतिक संकट के पीछे की पूरी कहानी और आगे की संभावनाएँ।
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पार्टी हाईकमान की सक्रियता


पार्टी हाईकमान ने प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ के लिए किया रवाना, राहुल गांधी बताए जा रहे चन्नी गुट से नाराज


पंजाब कांग्रेस में चल रही आंतरिक खींचतान के बीच पार्टी हाईकमान ने हस्तक्षेप किया है। विधानसभा चुनाव से पहले इस विवाद को सुलझाने के लिए उच्च नेतृत्व सक्रियता दिखा रहा है।


नाराज गुट, जो कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व में है, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम के चेहरे के रूप में पेश करने की मांग कर रहा है। वहीं, जिला अध्यक्ष और कार्यकर्ता वडिंग के प्रति संतुष्ट नजर आ रहे हैं।


राहुल गांधी से मुलाकात का न होना

पार्टी हाईकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह और विधायक राणा गुरजीत सिंह को दिल्ली बुलाया था। हालांकि, इनकी बैठक राहुल गांधी से नहीं हो सकी और केसी वेणुगोपाल के साथ चर्चा हुई।


इस बैठक में नाराज नेताओं की समस्याओं को ध्यान से सुना गया। राहुल गांधी से मुलाकात न होने का कारण बताया जा रहा है कि उन्होंने चन्नी को मिलने का समय नहीं दिया।


चन्नी की नीतियों पर राहुल गांधी की नाराजगी

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी चन्नी द्वारा पार्टी हाईकमान पर दबाव बनाने की रणनीति से असंतुष्ट हैं। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि चन्नी को जल्द ही राहुल गांधी से मिलने का अवसर मिलेगा।


पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजा वडिंग ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। चन्नी और उनके समर्थक चुनाव से पहले उन्हें सीएम का चेहरा बनाए जाने पर जोर दे रहे हैं, जबकि पार्टी हाईकमान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव राहुल गांधी के चेहरे पर लड़ा जाएगा।


राहुल गांधी की मंजूरी

भूपेश बघेल ने अपनी रिपोर्ट में नाराज नेताओं की बातों को पार्टी हाईकमान को सौंप दिया है। इस विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने न्यूट्रल रुख अपनाया है।


कांग्रेस हाईकमान ने चुनाव के लिए जो समितियाँ बनाई थीं, उनकी मंजूरी राहुल गांधी ने दी थी। चन्नी और उनके समर्थकों ने इस सूची को मानने से इनकार कर दिया है और भूपेश बघेल की बैठकों में भी शामिल नहीं हुए।