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पंजाब में झोटा हत्या मामले में 12 मांगें स्वीकार, मुख्य आरोपी को CBI रिमांड

पंजाब के मानसा में परविंदर झोटा की हत्या के मामले में एक्शन कमेटी और विशेष जांच टीम (SIT) के बीच हुई बैठक में 14 मांगों में से 12 को स्वीकार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी के इस्तीफे की मांग को छोड़कर अन्य मांगों पर सहमति बनी है। मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को CBI ने पांच दिन की रिमांड पर भेजा है। इस मामले में पंजाब फार्मेसी काउंसिल ने अश्विनी का पंजीकरण भी रद्द कर दिया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
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मानसा में झोटा हत्या मामले में नया मोड़

मानसा: पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में 23 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। एक्शन कमेटी, परिवार और विशेष जांच टीम (SIT) के बीच हुई बैठक में 14 मांगों में से 12 को मान लिया गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी के इस्तीफे की मांग को छोड़कर अन्य मांगों पर सहमति बनी है। इस बीच, मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को मोहाली की CBI अदालत ने पांच दिन की रिमांड पर भेज दिया है।


12 मांगों पर सहमति और लिखित आश्वासन

परविंदर झोटा की हत्या के संदर्भ में एक्शन कमेटी और SIT के बीच हुई बैठक में परिवार की मांगों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद, SIT ने स्वीकार की गई मांगों के संबंध में एक्शन कमेटी को एक लिखित पत्र सौंपा।


सरकार द्वारा दिए गए लिखित उत्तर पर चर्चा करने के लिए एक्शन कमेटी ने एक अलग बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इस बैठक में परविंदर झोटा के शव का पोस्टमॉर्टम करवाने और उसे चंडीगढ़ स्थित PGI भेजने के संबंध में भी निर्णय लिया जा सकता है।


मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को CBI रिमांड

हत्याकांड के मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को CBI ने मोहाली की अदालत में पेश किया। सुनवाई के बाद, अदालत ने उसे पांच दिन की रिमांड पर भेज दिया। जांच एजेंसी मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपों की जांच कर रही है।


गुरुवार को CBI की विभिन्न टीमों ने अश्विनी कुमार और उसके साथी विपिन कुमार के घरों पर लगभग आठ घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी ने मानसा मेडिकल हॉल की भी जांच की और आसपास के दुकानदारों से पूछताछ की।


इस मामले में चारों आरोपियों को अदालत ने 5 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।


पंजाब फार्मेसी काउंसिल ने रद्द किया अश्विनी कुमार का पंजीकरण

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए, पंजाब फार्मेसी काउंसिल की कार्यकारी समिति ने अश्विनी कुमार का फार्मासिस्ट पंजीकरण रद्द करने का निर्णय लिया है।


समिति की 20 अक्टूबर को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को रजिस्ट्रार ने आधिकारिक पत्र जारी किया और अश्विनी कुमार का नाम पंजीकृत फार्मासिस्टों के रजिस्टर से हटा दिया गया।


फार्मासिस्ट पंजीकरण का इतिहास

पंजाब फार्मेसी काउंसिल के रिकॉर्ड के अनुसार, अश्विनी कुमार का पंजीकरण नंबर 51464 था, जो 10 जुलाई 2020 को जारी किया गया था। पंजीकरण रद्द करने का आदेश 20 अक्टूबर से प्रभावी बताया गया है। इस कार्रवाई के बाद आरोपी के पेशेवर पंजीकरण पर भी कार्रवाई की गई है।