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पंजाब में भगवंत मान के OSD पर ED की कार्रवाई, मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर घुम्मन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई, जिसमें CBI की एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार किया गया था। आम आदमी पार्टी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2027 को होगी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे के आरोपों के बारे में।
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राजबीर घुम्मन केस में नया मोड़


पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन से संबंधित भ्रष्टाचार का मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजबीर सिंह घुम्मन के खिलाफ जालंधर में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई, जिसमें अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार किया था। इस नई कार्रवाई से पंजाब सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है।


SC के आदेश के बाद ED की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन अगली सुनवाई तक कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2027 को होगी। अदालत ने पंजाब सरकार को जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा था।


AAP ने ED की कार्रवाई पर उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी ने ईडी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ठीक अगले दिन मामला दर्ज होना सवाल खड़े करता है। पार्टी का कहना है कि जब अदालत ने सीबीआई को कठोर कार्रवाई से बचने का निर्देश दिया है, तो दूसरी केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। यह मामला पहले से ही पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है।


राजबीर घुम्मन पर आरोप क्या हैं?

यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों पर सरकारी कामकाज को प्रभावित करने और इसके बदले अनुचित आर्थिक लाभ लेने के आरोपों से संबंधित है। ईडी ने पहले पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को संदेश भेजा था, जिसमें अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया गया था। आरोपों में सरकारी अधिकारियों के तबादले, टेंडर प्रक्रिया, प्रशासनिक मंजूरियों, लाइसेंस जारी करने, और भूमि एवं संपत्ति संबंधी मामलों में हस्तक्षेप शामिल हैं।