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पंजाब में भाजपा और अकाली दल का नया गठबंधन: क्या है राजनीतिक मंशा?

पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच एक नया गठबंधन बनने की संभावना है। सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री से हालिया मुलाकात ने इस राजनीतिक समीकरण को नया मोड़ दिया है। जानें कि भाजपा को पंजाब में क्या चुनौतियाँ हैं और क्यों वह अकाली दल के साथ तालमेल की कोशिश कर रही है। क्या यह गठबंधन चुनावी सफलता दिला पाएगा? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
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भाजपा और अकाली दल का पुनर्मिलन


पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अकाली दल एक बार फिर से एकजुट हो रहे हैं। अकाली दल के नेता सुखबीर बादल ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात की। बादल ने यह भी बताया कि उनके कार्यकर्ता तालमेल की इच्छा रखते हैं। यह स्पष्ट है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक मंशा थी। लेकिन सवाल यह है कि भाजपा को ऐसा क्या संकेत मिला कि उसे अकाली दल के साथ गठबंधन करना चाहिए?


भाजपा ने पहले पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी। हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के दौरे के दौरान अकाली दल पर भी निशाना साधा था। हालांकि, बादल ने कहा कि उनका इशारा दूसरे अकाली दल की ओर था, क्योंकि पंजाब में कई अकाली दल सक्रिय हैं।


जानकार सूत्रों के अनुसार, भाजपा को पंजाब से नकारात्मक फीडबैक प्राप्त हुआ है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को कोई सीट नहीं मिली थी और पिछले विधानसभा चुनाव में भी उसे केवल दो सीटें मिली थीं। प्रधानमंत्री ने रविदासिया समुदाय के साथ संवाद किया है और डेरा सचखंड बलां का दौरा भी किया है, लेकिन जब तक जाट सिख समुदाय का समर्थन नहीं मिलता, तब तक स्थिति कठिन रहेगी।


सूत्रों का कहना है कि कैप्टेन अमरिंदर सिंह भी चाहते हैं कि भाजपा और अकाली दल के बीच तालमेल हो। इसलिए भाजपा ने भी दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। रवनीत सिंह बिट्टू की मंत्रिमंडल से विदाई के बाद यह चर्चा हो रही है कि जाट सिख समुदाय का कौन सा चेहरा सामने आएगा। संभव है कि हरसिमरत कौर बादल की सरकार में वापसी हो। तालमेल की बात सैद्धांतिक रूप से तय होने के बाद सीटों के बंटवारे में विवाद उत्पन्न हो सकता है।