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पंजाब विधानसभा सत्र: नशे के मुद्दे पर कांग्रेस का हंगामा और भगवंत मान के इस्तीफे की मांग

पंजाब विधानसभा के सत्र में नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की, जबकि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पलटवार किया। सदन में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला भी गरमाया। जानें इस राजनीतिक टकराव के पीछे की पूरी कहानी और क्या है कांग्रेस का अगला कदम।
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पंजाब विधानसभा सत्र में हंगामा

पंजाब विधानसभा के दूसरे दिन, शुक्रवार को, नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था पर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस के विधायकों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग करते हुए सदन में नारेबाजी की और विरोध स्वरूप वॉकआउट किया। इस बीच, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए विधायक सुखपाल सिंह खैहरा को निशाना बनाया। सदन में हंगामे के बीच नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रमुख मुद्दे बने रहे।


‘लेटर ऑफ शेम’ पर विवाद

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान, कांग्रेस विधायकों ने राज्य में नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इसी दौरान, कांग्रेस विधायक अपने निंदा पत्र, जिसे ‘लेटर ऑफ शेम’ कहा गया, लेकर सदन के वेल में पहुंचे। कांग्रेस ने सरकार को नशे की समस्या, गैंगस्टर गतिविधियों और आम लोगों की सुरक्षा के मुद्दे पर घेरने का प्रयास किया। विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां द्वारा निंदा पत्र को स्वीकार नहीं किए जाने पर कांग्रेस विधायकों ने अपना विरोध जारी रखा। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने कहा कि यदि विधानसभा अध्यक्ष उनका निंदा पत्र स्वीकार कर लेते हैं, तो कांग्रेस विधायक अपना विरोध समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।


कांग्रेस की इस्तीफे की मांग

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पंजाब सरकार नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई करने और राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में असफल रही है। विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को राज्य की स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने पहले भी नशे के कारोबार और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को इन गंभीर मुद्दों पर सदन में जवाब देना चाहिए। उल्लेखनीय है कि विधानसभा सत्र के पहले दिन 22 अक्टूबर को भी विपक्ष ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था।


परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला

पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला विधानसभा में राजनीतिक टकराव का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में एक मेडिकल स्टोर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद राज्य में नशे के कारोबार और उसे रोकने में प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस ने इस मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।