पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र रखने का निर्णय, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की घोषणा
मुख्यमंत्री का ऐलान
बिहार: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजधानी पटना के नाम को बदलने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि अब पटना को उसके प्राचीन नाम पाटलिपुत्र से जाना जाएगा। यह घोषणा उन्होंने पटना के नदियावां गांव में आयोजित प्रखण्ड सहयोग-सह-जन कल्याण शिविर में की।
पाटलिपुत्र का ऐतिहासिक महत्व
फुलवारीशरीफ के नदियावां में सहयोग शिविर के दौरान, मुख्यमंत्री ने कहा कि पटना की पहचान को पाटलिपुत्र के नाम से पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह शहर पहले भी मगध की राजधानी रहा है और इसका नाम पाटलिपुत्र था। इस संबंध में जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।
प्राचीन इतिहास
पटना, जो गंगा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है, का नाम पहले पाटलिपुत्र था। लगभग 2000 साल पहले इसे इसी नाम से जाना जाता था। 490 ईसा पूर्व में मगध सम्राज्य के राजा अजातशत्रु ने यहाँ पाटलिग्राम नामक सैन्य किला स्थापित किया था।
महानगर का गौरव
प्राचीन समय में, पाटलिपुत्र भारत के प्रमुख नगरों में से एक था। 460 ईसा पूर्व में अजातशत्रु के पुत्र उदयन ने इसे मगध की राजधानी बनाया। चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक के समय में यह शहर सबसे बड़ा बन गया। 1541 ईस्वी में अफगान शासक शेरशाह सूरी ने इसे पटना नाम दिया।
शिक्षा और संस्कृति का केंद्र
पाटलिपुत्र प्राचीन भारत के सबसे महत्वपूर्ण महानगरों में से एक था, जो वर्तमान में बिहार की राजधानी है। यह नंद, मौर्य, शुंग और गुप्त वंश की केंद्रीय और प्रशासनिक राजधानी रहा। महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक के समय में इसे दुनिया के सबसे बड़े शहरों में गिना जाता था।
आधुनिक प्रयास
गुप्त साम्राज्य के दौरान, यह आर्यभट्ट जैसे महान गणितज्ञों का कर्मभूमि रहा। समय के साथ इसका राजनीतिक महत्व कम होता गया, लेकिन शेरशाह सूरी ने इसे पुनः बसाया। आज भी कुम्हरार और बुलंदी बाग जैसे स्थलों पर मौर्यकालीन अवशेषों की खुदाई होती है। बिहार सरकार ने पटना का नाम वापस पाटलिपुत्र रखने का आधिकारिक ऐलान किया है।
