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पतंजलि फूड्स के शेयरों में भारी गिरावट, निवेशकों में चिंता

पतंजलि फूड्स के शेयरों में हाल ही में भारी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी के शेयरों में लगभग 20% की कमी आई है, जो लगातार तीसरे सत्र में हो रही है। पिछले एक साल में शेयरों में 35% की गिरावट दर्ज की गई है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और निवेशकों की स्थिति के बारे में।
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पतंजलि के शेयरों में गिरावट


बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि फूड्स के शेयरों में भारी गिरावट आई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी के शेयरों में लगभग 20% की कमी आई। यह लगातार तीसरे सत्र में हुआ है जब कंपनी के शेयर लाल निशान पर बंद हुए हैं। निवेशकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि कंपनी का शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर ₹347.59 पर पहुंच गया है।


बिकवाली का प्रभाव

पतंजलि फूड्स के शेयरों में गिरावट का मुख्य कारण बिकवाली का दबाव है। 15 जुलाई को लगभग 2.6 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई, जो कंपनी के कुल शेयरों का 2.43% है। यह आंकड़ा स्टॉक के औसत ट्रेडिंग वैल्यू का छह गुना से अधिक है।


पिछले एक साल में गिरावट

पिछले एक साल में पतंजलि फूड्स के शेयरों में लगभग 35% की गिरावट आई है। आज की गिरावट ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। हालांकि, एक दिन की गिरावट से किसी शेयर पर ज्यादा असर नहीं पड़ता, लेकिन लगातार गिरावट एक गंभीर चिंता का विषय है।


शेयरों का लॉक होना

शुरुआती कारोबार में कंपनी के शेयरों में 30 मिनट के भीतर लगभग 7% की गिरावट आई। ठीक 10:22 बजे, शेयर 10% गिरकर लोअर सर्किट पर लॉक हो गए। शेयर ने 407.55 रुपये के पिछले बंद भाव के मुकाबले 407.50 रुपये पर शुरुआत की थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।


हिस्सेदारी का विवरण

कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 68.25%, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की 11.05% और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की 8.53% है।


गिरावट के कारण


  • बुधवार को कंपनी के शेयरों में 7% की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट देखी गई, जिसके बाद बिकवाली का दबाव बढ़ा।

  • शुरुआती कारोबार में 67 लाख शेयरों का कारोबार भी बिकवाली को बढ़ावा दिया।

  • कंपनी का FMCG इंडेक्स पिछले कई महीनों से अपने सेक्टर से पीछे चल रहा है।

  • पिछली चार तिमाहियों में EBITDA ग्रोथ का ट्रेंड निवेशकों को संतुष्ट नहीं कर पाया।


निवेशकों की स्थिति

हालांकि, कंपनी में बड़े निवेशक अभी भी बने हुए हैं। GQG Partners के पास 11.42% और LIC के पास 9.13% हिस्सेदारी है। इस स्थिति में निवेशकों को डरने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन शेयरों पर बिकवाली का दबाव स्पष्ट है।