पश्चिम बंगाल की राजनीति में एनसीपीआई का उभार: तृणमूल कांग्रेस के बागियों का विलय
पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हलचल के बीच एक छोटी सी पार्टी, नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई), अचानक चर्चा का विषय बन गई है। यह तब हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने इस पार्टी में शामिल होने की घोषणा की।
पार्टी की स्थापना और चुनावी प्रयास
2023 में हुई थी पार्टी की शुरुआत
एनसीपीआई की स्थापना जनवरी 2023 में हुई थी और इसे चुनाव आयोग में एक रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत किया गया। हालांकि, पार्टी ने अपना पहला चुनावी प्रयास त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में किया।
त्रिपुरा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन
त्रिपुरा चुनाव में नहीं चला जादू
हालांकि, चुनावी मैदान में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। उसने सात सीटों पर उम्मीदवार उतारने का प्रयास किया, लेकिन कई नामांकन रद्द हो गए। अंततः, पार्टी के उम्मीदवार केवल दो सीटों पर चुनाव लड़ सके और कुल मिलाकर उन्हें 822 वोट मिले। एक निर्दलीय उम्मीदवार को जोड़ने पर भी पार्टी का कुल वोट आंकड़ा लगभग 1,200 ही रहा।
पार्टी का नेतृत्व
कौन चला रहा है पार्टी?
पार्टी के अध्यक्ष उत्तिया कुंडू हैं, जबकि उनकी पत्नी शेवली कुंडू कोषाध्यक्ष हैं। दोनों का संबंध पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले से है। चुनाव के दौरान, पार्टी ने खुद को आदिवासी और वंचित समुदायों की आवाज बताने का प्रयास किया, लेकिन चुनाव के बाद संगठन लगभग निष्क्रिय हो गया।
चुनाव के बाद की स्थिति
चुनाव के बाद संगठन पड़ा ठंडा
त्रिपुरा में पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं का कहना है कि चुनाव के बाद नेतृत्व से उनका संपर्क टूट गया और संगठन धीरे-धीरे ठप पड़ गया। संसाधनों की कमी और आंतरिक मतभेदों के कारण पार्टी आगे नहीं बढ़ सकी।
संसद में नई पहचान
अब संसद तक पहुंची चर्चा
अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने के बाद, यह छोटी पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बन गई है। बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग की है। एनसीपीआई, जो पहले कुछ सौ वोटों तक सीमित थी, अब संसद की राजनीति में एक नई चर्चा का विषय बन गई है।
