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पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण में महत्वपूर्ण बदलाव

पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। विधानसभा ने OBC आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही 113 जातियों को सूची से बाहर करने का भी निर्णय लिया गया है। यह कदम कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप उठाया गया है। नए कानून के तहत पिछड़ा वर्ग आयोग को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। जानें इस बदलाव का राज्य की आरक्षण व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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पश्चिम बंगाल में आरक्षण व्यवस्था में बदलाव


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में आरक्षण प्रणाली को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। विधानसभा ने सोमवार को OBC आरक्षण से संबंधित दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को स्वीकृति प्रदान की। सरकार का कहना है कि यह कदम कलकत्ता हाई कोर्ट के 2024 के निर्णय के अनुरूप उठाया गया है। नए कानून के लागू होने के बाद राज्य में OBC आरक्षण की संरचना में बदलाव होगा। इसके साथ ही पिछड़े वर्गों की पहचान और सूचीकरण की प्रक्रिया में आयोग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।


राज्य विधानसभा द्वारा पारित नए विधेयकों के अनुसार OBC आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही पहले से सूची में शामिल 113 अतिरिक्त जातियों और उपजातियों को हटाने का निर्णय भी लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव न्यायालय के निर्देशों के आधार पर किया गया है और इसका उद्देश्य आरक्षण प्रणाली को कानूनी रूप से मजबूत बनाना है।


हाई कोर्ट के आदेश का प्रभाव

सरकार ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद लिया गया, जिसमें केवल मूल 66 OBC श्रेणियों को मान्यता दी गई थी। अदालत ने पिछली प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा था कि नई श्रेणियों को शामिल करने में निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर अब आरक्षण प्रणाली को पुराने ढांचे में वापस लाया गया है।


आयोग को मिली नई जिम्मेदारी

नए कानून के तहत पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग को केंद्रीय भूमिका सौंपी गई है। अब किसी भी नए समुदाय को OBC सूची में शामिल करने से पहले आयोग उसकी सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन करेगा। आयोग की रिपोर्ट और सिफारिश के बाद ही राज्य सरकार अंतिम निर्णय ले सकेगी। इससे प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और संस्थागत बनाने का प्रयास किया गया है।


113 जातियों को सूची से बाहर करने पर चर्चा

सरकार का आरोप है कि पिछली व्यवस्था में कई समुदायों को उचित जांच के बिना OBC सूची में जोड़ा गया था, जिनमें विभिन्न उपजातियों की बड़ी संख्या शामिल थी। सरकार का कहना है कि यह कदम कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। हालांकि, इस निर्णय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।


सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में कोई बदलाव नहीं किया गया है। भविष्य में यदि कोई समुदाय सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा पाया जाता है और आयोग उसकी सिफारिश करता है, तो उसे नियमों के तहत OBC सूची में शामिल किया जा सकेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नए प्रावधान लागू होने के बाद राज्य की आरक्षण व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है।