पश्चिम बंगाल में TMC के बागी सांसदों की बीजेपी से दूरी: क्या है असली वजह?
सियासी उठापटक के बीच बागी सांसदों की नई स्थिति
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच, पार्टी के बागी सांसदों के रुख पर नई चर्चाएँ शुरू हो गई हैं। खबरों के अनुसार, कुछ सांसद जो टीएमसी छोड़कर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, अब बीजेपी से दूरी बनाए रखना चाहते हैं। इन नेताओं को चिंता है कि बीजेपी के साथ नजदीकी उनके क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है, साथ ही उनके वोट बैंक पर भी असर डाल सकती है।
बागी गुट के तीन सांसद कौन हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, बागी गुट के तीन सांसद बीजेपी के करीब जाने को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं। इनमें पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहिर खान और जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान शामिल हैं। ये सभी सांसद ऐसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहाँ मुस्लिम मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बीजेपी से नजदीकी को लेकर चिंताएँ
सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों का मानना है कि बीजेपी के साथ खड़े होने से उनके पारंपरिक वोट बैंक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उनका तर्क है कि यदि वे बीजेपी के साथ नजदीकी बढ़ाते हैं, तो उनके क्षेत्र के मतदाता इसे उनके खिलाफ कदम मान सकते हैं। यही कारण है कि ये तीनों नेता बीजेपी से दूरी बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।
पीएम मोदी की NDA बैठक में अनुपस्थिति
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एनडीए की बैठक में इन तीनों सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को और बढ़ावा दिया। हालांकि, जब बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने दिल्ली में एक बैठक बुलाई, तो यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान उसमें शामिल हुए। सांसदों का कहना था कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को सामने रखने के लिए बैठक में आए थे।
अबू ताहिर का स्पष्ट रुख
मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहिर खान ने हाल ही में स्पष्ट किया कि वे एनडीए का हिस्सा नहीं हैं। फिर भी, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आयोजित नाश्ते की बैठक में भाग लिया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य बीजेपी या एनडीए को समर्थन देना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को उठाना था।
अबू ताहिर ने मतदाता सूचियों में नाम हटाए जाने, मस्जिदों में लाउडस्पीकर के उपयोग पर पाबंदी और नई रेलवे लाइन की मांग जैसे मुद्दों को प्रधानमंत्री के सामने रखा।
बागी सांसदों पर भ्रम फैलाने का आरोप
इस बीच, टीएमसी के कुछ नेता अब भी पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं। कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर खुद को NCPI का सदस्य बताया है, जबकि NCPI पहले से ही एनडीए का हिस्सा है। ऐसे में बागी सांसदों के अगले राजनीतिक कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
