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पश्चिम बंगाल में उपचुनाव की तैयारी, तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर विवाद

पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही तृणमूल कांग्रेस में चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद गहरा गया है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के नेताओं को बुलाकर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। ऋतब्रत बनर्जी और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुटों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए हैं। यदि चुनाव आयोग किसी एक गुट को मान्यता नहीं देता है, तो दोनों गुटों के उम्मीदवारों को स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ना पड़ सकता है। जानिए इस राजनीतिक हलचल के पीछे की पूरी कहानी।
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पश्चिम बंगाल में उपचुनाव की हलचल


नई दिल्ली में, पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के नेताओं को बुलाकर चुनाव चिन्ह के विवाद को सुलझाने का प्रयास किया। ऋतब्रत बनर्जी और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुटों ने आयोग के समक्ष अपने तर्क प्रस्तुत किए।


शनिवार को, ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने चुनाव आयोग के सामने अपनी दलीलें पेश कीं और सवालों के उत्तर दिए। आयोग ने उनसे दिन के अंत से पहले अतिरिक्त दस्तावेज़ जमा करने का अनुरोध किया। उल्लेखनीय है कि रेजीनगर और नंदीग्राम में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने वाले हैं, और नामांकन की अंतिम तिथि 16 सितंबर है। दलबदल करने वाले गुट को चुनाव चिन्ह पर निर्णय की आवश्यकता है।


इसी दिन, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के प्रतिनिधियों ने भी चुनाव आयोग से मुलाकात की। उनके पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में डेरेक ओ'ब्रायन, कल्याण बनर्जी, सागरिका घोष, साकेत गोखले और वकील अभिनव सिंह शामिल थे। उन्होंने अपने को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा पेश किया। यदि 16 सितंबर तक चुनाव आयोग किसी एक गुट को मान्यता नहीं देता है, तो दोनों गुटों के उम्मीदवारों को स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना पड़ सकता है। चुनाव आयोग पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह भी जब्त कर सकता है।