पश्चिम बंगाल में उपचुनाव: ममता बनर्जी की चुनौती और संभावनाएं
पश्चिम बंगाल में उपचुनाव की घोषणा
पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान किया गया है। नामांकन की प्रक्रिया नौ सितंबर से शुरू होगी और मतदान छह अक्टूबर को होगा। यह चुनाव नवरात्रि के दौरान आयोजित होगा। एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी इस उपचुनाव में भाग लेंगी? उन्होंने पहले नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा था। 2021 में मुख्यमंत्री रहते हुए, उन्होंने अपनी पारंपरिक भबानीपुर सीट छोड़कर नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था, जहां उन्होंने शुभेंदु अधिकारी को चुनौती दी थी। उस चुनाव में उनकी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की, लेकिन ममता खुद मामूली अंतर से हार गईं। 2026 के चुनाव में शुभेंदु ने नंदीग्राम के साथ-साथ ममता की पारंपरिक भबानीपुर सीट पर भी उनके खिलाफ चुनाव लड़ा और वहां भी जीत हासिल की। अब उस सीट पर उपचुनाव होना है।
नंदीग्राम और रेजीनगर की सीटों की स्थिति
नंदीग्राम सीट पूर्वी मेदिनीपुर में स्थित है, जो अधिकारी परिवार का गढ़ है। शुभेंदु अधिकारी इस सीट से तीन बार जीत चुके हैं। हालांकि, 2016 से पहले के चुनावों में, ममता बनर्जी की पार्टी ने 2009 और 2011 में इस सीट पर जीत हासिल की थी। तृणमूल कांग्रेस की फिरोजा बीबी ने दो बार यहां जीत दर्ज की थी। 2026 में, जब शुभेंदु मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, तब भी ममता की पार्टी के खिलाफ माहौल था, फिर भी जीत-हार का अंतर केवल 10 हजार वोट का रहा। ममता ने पवित्र कार को मैदान में उतारा था, जो पहले शुभेंदु के करीबी थे। पवित्र कार को 1,17,000 और शुभेंदु को 1,27,000 वोट मिले थे। इसका मतलब है कि विपरीत परिस्थितियों में भी ममता के पास वहां एक मजबूत वोट बैंक है। यदि वे वहां से चुनाव लड़ती हैं, तो उनके प्रति सहानुभूति भी हो सकती है।
रेजीनगर सीट पर ममता का विकल्प
दूसरी सीट, जहां उपचुनाव हो रहा है, वह रेजीनगर है, जो हुमायूं कबीर के इस्तीफे के कारण खाली हुई है। हुमायूं कबीर ने चुनाव से पहले एक अलग पार्टी बना ली थी और दो सीटों से चुनाव लड़ा था। चुनाव से पहले उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे भाजपा के साथ सौदों की बात कर रहे थे। इसके बावजूद, उन्होंने दोनों मुस्लिम बहुल सीटों से जीत हासिल की। जब ममता भबानीपुर से हार गईं, तब हुमायूं कबीर ने उन्हें अपनी खाली की हुई सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन ममता ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अब हुमायूं कबीर ने उपचुनाव के लिए गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार घोषित किया है। पिछले चुनाव में कबीर को लगभग 52% वोट मिले थे।
ममता के लिए चुनावी रणनीति
इस सीट पर ममता के लिए चुनौती है। बिना हुमायूं कबीर के समर्थन के, वहां चुनाव लड़ना मुश्किल होगा। यदि ममता उपचुनाव लड़ने का निर्णय लेती हैं, तो उनके लिए नंदीग्राम से लड़ना अधिक फायदेमंद होगा। यदि वे वहां जीत जाती हैं, तो यह उनके लिए एक बड़ी नैतिक जीत होगी और शुभेंदु अधिकारी के लिए भी मुश्किलें बढ़ेंगी।
