पश्चिम बंगाल में टीएमसी को बड़ा झटका: 14 बागी सांसदों ने उठाया कदम
सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय एक गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी के प्रमुख नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने सोमवार को अचानक पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने सांसद पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल मचा दी है। सुखेंदु शेखर रॉय पिछले एक दशक से टीएमसी का प्रमुख चेहरा रहे हैं, इसलिए उनका यह कदम ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद, टीएमसी के पांच अन्य सांसद भी उनके साथ खड़े नजर आए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बगावत की योजना पहले से ही बनाई जा चुकी थी।
दिल्ली में बागी सांसदों की बैठक
दिल्ली में शुभेंदु अधिकारी से मिले 14 बागी सांसद
सुखेंदु शेखर के इस्तीफे के बाद, दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गईं। टीएमसी के लगभग 14 बागी लोकसभा सांसदों ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक महत्वपूर्ण और गुप्त बैठक की। इस बैठक के बाद, इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और एक पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने अपने गुट को टीएमसी से अलग एक स्वतंत्र संसदीय दल का दर्जा देने की मांग की। इन सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की इच्छा भी व्यक्त की है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
बगावत का नया दौर
विधानसभा के बाद अब संसद में बगावत
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में हाल ही में हुए विद्रोह के कुछ दिनों बाद ही सामने आया है। कुछ दिन पहले, टीएमसी के 58 विधायकों ने पार्टी आलाकमान के खिलाफ बगावत की थी। इन विधायकों ने ममता बनर्जी के आधिकारिक उम्मीदवार का नाम खारिज करते हुए विपक्ष के नेता पद के लिए एक अन्य नेता का समर्थन किया था। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से पार्टी में असंतोष बढ़ता जा रहा था, जो अब सांसदों की इस खुली बगावत के रूप में सामने आया है।
टीएमसी में सन्नाटा और नए समीकरण
शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नए सियासी समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति एक नए मोड़ पर आ गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में एक नई राजनीतिक ताकत उभर रही है, जो टीएमसी के असंतुष्ट नेताओं को एकजुट कर रही है। यदि ये 14 सांसद औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ देते हैं, तो लोकसभा में टीएमसी की स्थिति कमजोर हो जाएगी। इस संकट पर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी या पार्टी आलाकमान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ममता इस स्थिति पर ध्यान दे रही हैं और जल्द ही कोई बड़ा निर्णय ले सकती हैं।
