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पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसदों के बीच असहमति का बढ़ता संकट

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों के बीच असहमति की एक नई लहर उठी है। 19 सांसदों ने एक असहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें प्रमुख नाम सायोनी घोष का भी है। यह स्थिति पार्टी के भीतर असंतोष को दर्शाती है और टीएमसी नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। जानें इस राजनीतिक उलटफेर के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
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पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसदों के बीच असहमति का बढ़ता संकट

पार्टी में असंतोष की लहर

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में एक नया मोड़ आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही खींचतान अब और गहराती जा रही है। हाल ही में असहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों की सूची सामने आई है, जिसने पार्टी में असंतोष की चर्चा को और तेज कर दिया है। इस पत्र पर 19 सांसदों के हस्ताक्षर होने की जानकारी मिली है, जबकि पहले 20 सांसदों का दावा किया गया था। इस सूची में प्रमुख नामों में सायोनी घोष, शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान और काकोली घोष दस्तीदार शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को भेजे गए असहमति पत्र पर तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। इस पत्र में लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की गई थी। हालांकि, अब 19 नामों की पुष्टि हुई है, जिनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदार, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपदा सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक शामिल हैं।

सायोनी घोष का नाम चौंकाने वाला
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सायोनी घोष ने टीएमसी का प्रचार करते हुए बीजेपी पर खुलकर हमला किया था। अब बागी सांसदों की सूची में उनका नाम आना एक बड़ा आश्चर्य है। सायोनी घोष को अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है, जिन्होंने उन्हें यूथ विंग की अध्यक्षता सौंपी थी। पार्टी में उनकी पहचान एक प्रमुख युवा नेता के रूप में रही है, इसलिए उनका बागी खेमे में शामिल होना टीएमसी नेतृत्व के लिए एक गंभीर राजनीतिक झटका माना जा रहा है।