पाकिस्तान की अदालत ने केपीके मुख्यमंत्री के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
पाकिस्तान की संघीय संवैधानिक अदालत का निर्णय
सोमवार को पाकिस्तान की संघीय संवैधानिक अदालत ने खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया। यह याचिका पूर्व सांसद और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) से अलग हुए नेता शेर अफजल मरवत द्वारा दायर की गई थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर को पुनः पद पर बहाल करने की मांग की गई थी। प्रधान न्यायाधीश अमीनउद्दीन खान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
अदालत ने अफरीदी और प्रांतीय सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले में देश के अटॉर्नी जनरल से सहायता मांगी। मरवत ने अदालत में दलील दी कि गंडापुर ने स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के निर्देश पर पद छोड़ा था। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार, किसी सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति को स्वेच्छा से इस्तीफा देना आवश्यक है।
मरवत ने यह भी बताया कि गंडापुर ने अपने इस्तीफे में स्पष्ट किया था कि वह खान के कहने पर ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने तर्क किया कि उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि कोई अयोग्य व्यक्ति किसी प्रतिनिधि के माध्यम से राज्य का कार्य नहीं कर सकता। मरवत ने कहा कि जब खान ने गंडापुर को इस्तीफा देने का निर्देश दिया, तब वह पहले से ही अयोग्य घोषित हो चुके थे, इसलिए किसी प्रतिनिधि के माध्यम से राज्य के अधिकारों का प्रयोग करना संविधान का उल्लंघन है।
