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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विधानसभा चुनावों का दूसरा चरण संपन्न

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विधानसभा चुनावों का दूसरा चरण हाल ही में संपन्न हुआ, जिसमें धांधली और हिंसा के आरोप लगे। भारत ने इन चुनावों को अवैध बताया है, जबकि सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने मतदान का विरोध किया। जेएएसी के कार्यकर्ताओं ने कई क्षेत्रों में सड़कें अवरुद्ध कीं, जिससे तनाव बढ़ गया। जानें इस चुनावी प्रक्रिया के बारे में और क्या हुआ।
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया

(एम. जुल्करनैन) लाहौर, 2 अगस्त - पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चुनावों के दूसरे चरण का आयोजन रविवार को हुआ, जिसमें धांधली और हिंसा के आरोप लगे। भारत का मानना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न हिस्से हैं, जिनमें वे क्षेत्र भी शामिल हैं, जिन पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। भारत ने 28 जुलाई को इन चुनावों को मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने का प्रयास बताया।


रविवार की सुबह मतदान कर्मियों को सैन्य सुरक्षा के तहत मतदान केंद्रों तक पहुंचाया गया। हर वाहन में सुरक्षाकर्मी तैनात थे। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ पंजाब और सिंध प्रांतों से भी अधिकारियों को चुनाव सुरक्षा में मदद के लिए भेजा गया।


हालांकि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन प्रतिबंधित 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (जेएएसी) से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर सड़कें अवरुद्ध कर दीं और मतदान का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने गुजरा, तारिकाबाद, अपर प्लेट, सेंटर प्लेट, लोअर प्लेट, सामान बांडी और चेहला बांडी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सड़कें रोकीं, जिससे शहर में तनाव बना रहा। उन्होंने मीडिया पर भी आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों को उचित महत्व नहीं दिया जा रहा है।


जेएएसी एक संगठन है, जो विधानसभा की 12 विवादित सीटों को लेकर लगभग दो महीने से प्रदर्शन कर रहा है। उनका आरोप है कि इन सीटों में हेरफेर करके अपने पसंदीदा उम्मीदवार को प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश की जा रही है। जेएएसी के अनुसार, पहले चरण में सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में 37 लोग मारे गए थे।


दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद की नौ सीटों और 12 शरणार्थी सीटों पर मतदान की संख्या कम रही। इस क्षेत्र में कुल 45 सीटें हैं, जिन पर तीन चरणों में चुनाव हो रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जेएएसी के प्रदर्शनों के प्रभाव को कम करना है।


पहले चरण में 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान हुआ था। पीएमएल-एन ने नौ सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि पीपीपी ने चार सीटों पर जीत दर्ज की। पुंछ डिवीजन में नौ सीटों के लिए तीसरे चरण का मतदान 10 अगस्त को होगा।