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पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रिश्तों को मजबूत करने की कोशिशें तेज कीं

पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सऊदी क्राउन प्रिंस से बातचीत में हूती विद्रोहियों के हमलों की निंदा की। इस्लामाबाद ने स्पष्ट किया है कि मक्का रक्षा समझौते का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई में शामिल होगा। यमन में बढ़ते तनाव के बीच, सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएँ भी बढ़ गई हैं। जानें इस स्थिति का क्या प्रभाव पड़ सकता है।
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पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियाँ

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से पीछे हटने के संकेत मिलने के बाद, पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की, जिसमें उन्होंने हूती हमलों की कड़ी निंदा की।


मक्का रक्षा समझौते पर पाकिस्तान का स्पष्टीकरण

यह वार्ता तब हुई जब इस्लामाबाद ने स्पष्ट किया कि 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होगा। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहले कहा था कि यदि सऊदी अरब पर हमले जारी रहते हैं, तो यह समझौता लागू हो सकता है। लेकिन बाद में सरकार ने कहा कि यह समझौता मुख्य रूप से रक्षात्मक है।


शरीफ़ का सऊदी अरब के प्रति समर्थन

फोन पर बातचीत के दौरान, शरीफ़ ने सऊदी नेतृत्व के प्रति पाकिस्तान के "पूर्ण समर्थन" की बात की। उन्होंने कहा कि हूती हमले क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं।


यमन में बढ़ते तनाव का प्रभाव

यह बातचीत यमन में बढ़ते तनाव के बीच हुई है, जहां ईरान समर्थित हूती सेना और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच लड़ाई तेज हो गई है। हाल ही में हूतियों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर कब्जा कर लिया है।


सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएँ

यमन संघर्ष के बढ़ने के साथ, सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएँ भी बढ़ गई हैं। सऊदी समर्थित बलों ने हूती ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि हूतियों ने सऊदी अरब की ओर फायरिंग की है।


शरीफ़ की ट्रंप से संभावित मुलाकात

शरीफ़ का सऊदी अरब के साथ संपर्क अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ संभावित मुलाकात से पहले हुआ है। यह मुलाकात 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान होने की संभावना है।