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पाकिस्तान में जल संकट: भारत के निर्णय से बढ़ा दबाव

भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद पाकिस्तान में जल संकट को बढ़ा दिया है। इस निर्णय के कारण पाकिस्तान की सिंचाई प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है, जिससे कृषि, खाद्य सुरक्षा और महंगाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। रिपोर्टों के अनुसार, पानी का स्तर लगातार घट रहा है, जिससे गेहूं और चावल जैसी फसलों पर संकट उत्पन्न हो सकता है। जानें इस गंभीर स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
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पाकिस्तान का जल संकट


भारत द्वारा सिंधु जल संधि के स्थगन का प्रभाव
भारत ने मई 2025 में सिंधु जल संधि को एकतरफा तरीके से स्थगित करने की घोषणा की थी, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान की सिंचाई प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है। जलाशयों, बैराजों और लिंक नहरों में पानी की कमी से कृषि, खाद्य सुरक्षा और जल प्रबंधन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। इससे पाकिस्तान में महंगाई भी बढ़ सकती है।


पाकिस्तान में तीन प्रमुख जलाशय, छह बैराज और बारह लिंक नहरों का एक विशाल नेटवर्क है, जो लगभग 35 मिलियन एकड़ भूमि की सिंचाई करता है और देश के 90 प्रतिशत से अधिक खाद्य उत्पादन का आधार है। इस नेटवर्क पर पानी की कमी का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है।


महंगाई की बढ़ती संभावना

मराला बैराज, जो औसतन 25 मिलियन एकड़-फीट का वार्षिक प्रवाह संभालता है, लगभग 10 मिलियन एकड़ भूमि की सिंचाई करता है। यह क्षेत्र पाकिस्तान के सबसे उपजाऊ कृषि क्षेत्रों में से एक है, जो गेहूं, चावल, गन्ना और अन्य फसलों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पानी की कमी का असर इन फसलों पर पड़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है।


पानी के स्तर में गिरावट

रिपोर्टों के अनुसार, आईबीआईएस का प्रमुख मराला बैराज, जहां चिनाब नदी का औसत वार्षिक प्रवाह 25 मिलियन एकड़-फीट होता है, इस वर्ष पानी का बहाव घटकर केवल 1500 क्यूसेक रह गया है। सामान्य दिनों में यह प्रवाह लगभग 34 हजार क्यूसेक होना चाहिए था।


इसका मतलब है कि प्रवाह में लगभग 95 प्रतिशत की कमी आई है, जिसका सीधा असर गेहूं, चावल और गन्ने जैसी फसलों पर पड़ रहा है। यह स्थिति पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा और लाखों किसानों की आजीविका के लिए गंभीर खतरा बन गई है।