पाकिस्तान में सिंचाई के पानी में 22% कमी का खतरा, खाद्य सुरक्षा पर असर
सिंचाई के पानी में कमी का अनुमान
पाकिस्तान के सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (IRSA) ने आगामी रबी फसल सीज़न के लिए पंजाब और सिंध, देश के दो प्रमुख कृषि राज्यों, के लिए सिंचाई के पानी में 22 प्रतिशत की कमी का अनुमान लगाया है। रबी सीज़न में गेहूं, जौ, सरसों और चना जैसी महत्वपूर्ण फसलें उगाई जाती हैं, जिससे यह कमी पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन गई है। हालांकि, पाकिस्तानी नेता भारत पर सिंधु जल संधि (IWT) का उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन IRSA की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि इस जल संकट का असली कारण पाकिस्तान का आंतरिक कुप्रबंधन और अव्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर है.
IRSA की रिपोर्ट और जल संकट
कराची के एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, IRSA, जो सिंधु नदी प्रणाली के पानी के वितरण की निगरानी करती है, ने रबी के मौसम (1 अक्टूबर से 31 मार्च) के दौरान पानी की 22% कमी का अनुमान लगाया है। यह कमी पाकिस्तान के कृषि केंद्रों, पंजाब और सिंध, पर प्रभाव डालेगी, क्योंकि किसान गेहूं और अन्य सर्दियों की फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं।
जलविद्युत परियोजनाओं में देरी
IRSA द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि इस कमी का कारण इन प्रांतों में कई जलविद्युत परियोजनाओं के पूरा होने में देरी है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब कई पाकिस्तानी नेता यह दावा कर रहे हैं कि भारत उन्हें सिंधु प्रणाली में पानी का उचित हिस्सा नहीं दे रहा है।
पानी की कमी का प्रभाव
पाकिस्तान में सिंचाई के पानी की अनुमानित कमी से गेहूं की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जबकि देश पहले से ही पिछले साल के लक्ष्य से कम उत्पादन के कारण सप्लाई की कमी का सामना कर रहा है। पिछले रबी सीज़न में पानी की कमी के बावजूद, पाकिस्तान को गेहूं की दो मिलियन टन से अधिक की कमी का सामना करना पड़ा था।
भारत पर आरोप और घरेलू चुनौतियाँ
हालांकि, पाकिस्तान ने भारत पर आरोप लगाया है कि नई दिल्ली ने IWT को रोकने के बाद सिंधु नदी के बहाव को रोक दिया है। हाल ही में, पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी थी कि पानी के बंटवारे में किसी भी तरह की बाधा क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
