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पीएम मोदी की अपील: विदेश यात्रा और शादियों पर खर्च कम करने की आवश्यकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से विदेश यात्रा और शादियों पर खर्च कम करने की अपील की है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और 'मेड इन इंडिया' को बढ़ावा देने पर जोर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय परिवार हर साल विदेश में शादियों और यात्रा पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं। इस लेख में, हम जानेंगे कि कैसे ये खर्च भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं और पीएम मोदी की अपील का क्या उद्देश्य है।
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प्रधानमंत्री मोदी का संदेश

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारत की 7.8 प्रतिशत आर्थिक विकास दर पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और 'मेड इन इंडिया' को बढ़ावा देने की बात करते हुए लोगों से विदेशी सामान और विदेश यात्रा पर होने वाले खर्च को कम करने की अपील की। पीएम मोदी ने विशेष रूप से विदेश यात्रा और विदेश में शादी करने के बजाय भारत में पर्यटन और डेस्टिनेशन वेडिंग को प्राथमिकता देने की सलाह दी।


विदेश में शादियों पर खर्च

डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में होने वाली लगभग 89 से 90 प्रतिशत शादियां किसी न किसी रूप में डेस्टिनेशन वेडिंग की श्रेणी में आती हैं, जिनमें से 21 से 27 प्रतिशत शादियां विदेशों में आयोजित होती हैं। NRI परिवारों और उन भारतीय परिवारों का एक वर्ग है जो विदेश में शादी समारोह आयोजित करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, NRI समुदाय हर साल शादी समारोहों पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये खर्च करता है।


शादी पर खर्च का आंकड़ा

Partners Universal International Research Journal (PUIRJ) की एक स्टडी के अनुसार, लगभग 5,000 अमीर भारतीय कपल विदेश में शादी करना पसंद करते हैं। इनमें कारोबारी और उच्च पदों पर कार्यरत लोग शामिल हैं। विदेश में एक भारतीय शादी पर औसतन 1 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक खर्च हो सकता है। अनुमान है कि विदेशों में होने वाली भारतीय शादियों के कारण लगभग 25,000 करोड़ रुपये भारत से बाहर जा रहे हैं।


विदेश में शादी का आर्थिक प्रभाव

एक पुराने अध्ययन के अनुसार, भारत का शादी बाजार लगभग 3.36 लाख करोड़ रुपये का है, जिसमें से करीब 21 हजार करोड़ रुपये विदेशों में खर्च होने का अनुमान है। यह राशि आने वाले वर्षों में बढ़कर लगभग 42 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। विदेश में शादियों का असर केवल विदेशी मुद्रा के बाहर जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत में स्थानीय कारोबार और सरकार के टैक्स राजस्व पर भी प्रभाव पड़ता है।


भारतीय शादी बाजार में ज्वेलरी और कपड़ों का योगदान

Jefferies की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवारों के खर्च में शादी का हिस्सा महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक औसत भारतीय परिवार की सालाना आय लगभग 4 लाख रुपये है, जबकि शादी पर खर्च इससे कई गुना अधिक हो सकता है।


विदेश यात्रा पर भारतीयों का खर्च

विदेश में शादी के अलावा, भारतीय पर्यटकों का विदेशी यात्रा पर खर्च भी काफी बड़ा है। RBI के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मार्च में भारतीयों ने विदेशी यात्रा पर लगभग 10,400 करोड़ रुपये खर्च किए।


छुट्टियों के लिए विदेश यात्रा

पर्यटन मंत्रालय के 'Annual Tourism Snapshot 2025' के अनुसार, विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों में लगभग 43.5 प्रतिशत लोग छुट्टियां मनाने के उद्देश्य से गए।


वीजा पर खर्च

2024 में भारतीयों ने लगभग 11 लाख शेंगेन वीजा आवेदन किए, जिन पर उन्होंने करीब 916 करोड़ रुपये खर्च किए। हालांकि, लगभग 1.65 लाख आवेदन खारिज हो गए।


पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य

पीएम मोदी की अपील का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर खर्च और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देना है। यदि भारतीय परिवार विदेश जाने या विदेश में शादी करने के बजाय देश के पर्यटन स्थलों पर खर्च करते हैं, तो इससे कई क्षेत्रों को लाभ होगा।