पूर्व ईडी अधिकारी निरंजन सिंह ने अकाली दल 'वारिस पंजाब दे' से लिया अलगाव
निरंजन सिंह का अकाली दल से अलग होना
जालंधर- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह ने अकाली दल 'वारिस पंजाब दे' से खुद को अलग करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि पंजाब में नशे के बढ़ते कारोबार, भ्रष्टाचार, गैंगस्टरों की गतिविधियों, जबरन वसूली और मादक पदार्थों की तस्करी में पुलिसकर्मियों की कथित संलिप्तता जैसे मुद्दों पर उन्होंने पार्टी को समर्थन दिया था, लेकिन कुछ मुद्दों पर उनके विचार भिन्न हैं, जिन पर समझौता नहीं किया जा सकता।
निरंजन सिंह ने एक बयान में कहा कि सार्वजनिक जीवन में हर व्यक्ति का आचरण भारत के संविधान के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा, “कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं, जो समझौता नहीं किए जा सकते। मैं उनसे अलग हो रहा हूं और उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।”
पूर्व ईडी अधिकारी ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या, भ्रष्टाचार और अपराध जैसे मुद्दे गंभीर हैं, और इन्हीं कारणों से उन्होंने अकाली दल 'वारिस पंजाब दे' का समर्थन किया था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ विचारों पर उनकी सहमति नहीं है।
निरंजन सिंह हाल ही में अकाली दल 'वारिस पंजाब दे' में शामिल हुए थे। 23 सितंबर को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पार्टी में शामिल होने के समय उन्होंने पंजाब में नशे और भ्रष्टाचार की स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी। उनके साथ पूर्व पंजाब पुलिस डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों ने भी पार्टी की सदस्यता ली थी।
निरंजन सिंह मई 2021 में ईडी के उप निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने पंजाब में कई चर्चित मादक पदार्थ मामलों की जांच की थी, जिसमें करोड़ों रुपये का जगदीश भोला ड्रग रैकेट मामला भी शामिल था। इस मामले की जांच के दौरान उन्होंने पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया और सरवन सिंह फिल्लौर समेत कई वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ की थी।
