प्रधानमंत्री मोदी की अपील: सोने की खरीदारी और विदेश यात्रा से बचें
प्रधानमंत्री की चेतावनी
नई दिल्ली: हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था ने जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों ने सरकार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। युद्ध, महंगे कच्चे तेल और कमजोर सप्लाई चेन के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से खर्च में सावधानी बरतने का आग्रह किया है। उन्होंने सलाह दी है कि बिना आवश्यकता के सोना न खरीदें और गैरजरूरी विदेश यात्रा से बचें। विदेश में शादी करने से भी बचने की सलाह दी गई है।
सोने के आयात पर प्रभाव
भारत अपनी सोने की आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इस प्रकार, घरेलू मांग में वृद्धि से आयात बिल में इजाफा हो सकता है, जो विदेशी मुद्रा भंडार और डॉलर की मांग पर असर डाल सकता है। विशेषकर तब, जब कच्चे तेल के आयात पर भी भारत को भारी खर्च करना पड़ रहा है। सरकार का प्रयास है कि गैरजरूरी आयात पर खर्च को नियंत्रित किया जाए।
सोने के आयात में वृद्धि
सोने के आयात में तेज उछाल
वर्तमान वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में सोने का आयात पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 32 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। जुलाई में देश का व्यापार घाटा लगभग 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो जनवरी के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। भारत विश्व के प्रमुख सोना खरीदारों में से एक है, इसलिए मांग में थोड़ी सी वृद्धि भी आयात बिल पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है.
तेल और डॉलर का दबाव
तेल और डॉलर का दबाव
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से प्राप्त करता है। पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज क्षेत्र में संभावित व्यवधान से तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है। महंगा तेल भारत की डॉलर की आवश्यकता को बढ़ाता है। ऐसे में, यदि सोने का आयात भी बढ़ता है, तो व्यापार संतुलन और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए, सरकार आयात मांग को नियंत्रित रखना चाहती है.
विदेश यात्रा पर अपील
विदेश यात्रा पर भी अपील
प्रधानमंत्री ने केवल सोने की खरीद पर ही नहीं, बल्कि गैरजरूरी विदेश यात्राओं और विदेश में होने वाली शादियों को भी टालने की अपील की है। इसका उद्देश्य केवल विदेशी मुद्रा की बचत नहीं है, बल्कि सरकार चाहती है कि लोग अपने खर्च को देश के भीतर रखें। घरेलू उत्पाद, पर्यटन और सेवाओं पर खर्च बढ़ने से स्थानीय व्यवसाय को भी लाभ हो सकता है.
GDP वृद्धि के बावजूद सतर्कता
GDP मजबूत, फिर भी सतर्कता क्यों?
जून तिमाही में भारत की GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, लेकिन यह मार्च तिमाही के 8.6 प्रतिशत की तुलना में कम है। सरकार का संदेश है कि मजबूत विकास दर के बावजूद बाहरी जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। महंगाई, तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव जैसी चुनौतियां आगे भी प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए मोदी की अपील को आर्थिक संकट की घोषणा के बजाय सावधानी और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा रहा है.
