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प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चा तेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। पिछले कुछ महीनों में कई मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है, जिससे सरकार में कई पद खाली हो गए हैं। इस बीच, मोदी 'कामराज प्लान' पर विचार कर रहे हैं, लेकिन कई वरिष्ठ मंत्रियों ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। जानें इस स्थिति का क्या असर हो सकता है और आगे क्या होने की संभावना है।
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मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें


पिछले कुछ महीनों से यह चर्चा चल रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में बदलाव करने की योजना बना रहे हैं। विशेषकर जून में, जब उनकी सरकार के दो साल पूरे हुए, तब यह अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, तब कोई बदलाव नहीं हुआ, जिसके बाद यह उम्मीद जताई गई कि मानसून सत्र से पहले कुछ किया जाएगा। मोदी के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के अवसर पर भी मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावनाएं जताई गईं। इस बीच, उनकी सरकार में कई पद खाली होते रहे हैं। हाल ही में सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्यमंत्री एल मुरुगन ने इस्तीफा दिया है। इससे पहले जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू ने भी इस्तीफा दिया था।


इसके अलावा, तीन मंत्री दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पीयूष गोयल को मंत्री के साथ-साथ पार्टी का कोषाध्यक्ष भी बनाया गया है। वहीं, पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः उत्तर प्रदेश और दिल्ली का अध्यक्ष बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव चार महीने में होने हैं। इस बार दो मंत्रियों को राज्यसभा के लिए नहीं भेजा गया है। हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। यदि इन दोनों का भी इस्तीफा होता है, तो कुल छह मंत्री पद खाली होंगे।


इस बीच, यह भी चर्चा है कि प्रधानमंत्री मोदी 'कामराज प्लान' पर विचार कर रहे हैं। कामराज ने नेहरू मंत्रिमंडल को नया रूप देने के लिए एक योजना बनाई थी, जिसके तहत कई मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था। हालांकि, ऐसा लगता है कि मोदी और अमित शाह का यह प्लान सफल नहीं हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों से इस्तीफा देने को कहा गया है, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया है। वरिष्ठ नेता यह मानने को तैयार नहीं हैं कि मंत्रिमंडल में बदलाव के लिए उनका इस्तीफा आवश्यक है। उनका तर्क है कि प्रधानमंत्री खुद 76 वर्ष के हैं, तो उनसे कम उम्र के मंत्रियों को क्यों हटाया जाए। असली बदलाव तब होगा जब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री या पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे बड़े नेता इस्तीफा देंगे।