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प्रधानमंत्री मोदी ने रेस कोर्स रोड का नाम बदला, जानें इसके पीछे की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा है, जो उनके द्वारा किए गए अन्य नामकरण परिवर्तनों का हिस्सा है। इस लेख में, हम जानेंगे कि यह बदलाव क्यों किया गया और इसके पीछे की कहानी क्या है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री के निवास के आसपास के भूगोल में हो रहे परिवर्तनों और झुग्गियों के विध्वंस पर भी चर्चा की जाएगी। क्या सरकार के पास इस बदलाव के लिए कोई बड़ी योजना है? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
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प्रधानमंत्री मोदी ने रेस कोर्स रोड का नाम बदला, जानें इसके पीछे की कहानी

लोक कल्याण मार्ग का नया नामकरण


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रख दिया है। यह बदलाव उनके द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ और राजपथ का नाम कर्तव्य पथ रखने के बाद किया गया है। जब रेस कोर्स नाम था, तब एक लेखक ने व्यंग्य करते हुए लिखा था कि प्रधानमंत्री के निवास के सामने घोड़ों पर करोड़ों का सट्टा लगता है। वास्तव में, दिल्ली में लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने रेस कोर्स है, जहां घोड़ों की रेस होती है। इसके अलावा, दिल्ली जयपुर पोलो क्लब भी वहीं है, जहां कई प्रमुख व्यक्तियों के घोड़ों के अस्तबल हैं। प्रधानमंत्री के निवास के पास जिमखाना क्लब भी है, जिसे सरकार के एक सूचना सलाहकार ने दारूबाजों का अड्डा बताया है। यह उल्लेखनीय है कि नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी का नाम अब प्रधानमंत्री मेमोरियम म्यूजियम एंड लाइब्रेरी कर दिया गया है। प्रधानमंत्री के निवास से थोड़ी दूरी पर कई झुग्गी झोपड़ियां भी हैं।


भूगोल में बदलाव और नई योजनाएं

प्रधानमंत्री के निवास के आसपास का भूगोल यह दर्शाता है कि यह एक अद्भुत स्थान है। यहां सबसे शक्तिशाली व्यक्ति का घर है, साथ ही देश की सबसे समृद्ध लाइब्रेरी भी है। इसके साथ ही, सट्टेबाजी और दारूबाजी के अड्डे और गरीबों के आशियाने भी हैं। लेकिन अब सब कुछ बदल रहा है। प्रधानमंत्री खुद वहां से स्थानांतरित होने वाले हैं। संसद के निकट एक नया प्रधानमंत्री एन्क्लेव बन रहा है, जो 15 एकड़ में तैयार हो रहा है। इससे पहले नया प्रधानमंत्री कार्यालय और उप राष्ट्रपति एन्क्लेव भी स्थापित किया गया था। हालांकि, नए उप राष्ट्रपति एन्क्लेव के पहले निवासी जगदीप धनखड़ को वहां से बेआबरू होकर जाना पड़ा।


अब सवाल यह उठता है कि जब प्रधानमंत्री लोक कल्याण मार्ग से स्थानांतरित होने वाले हैं, तो वहां सफाई का काम क्यों चल रहा है? जिमखाना क्लब, रेस कोर्स रोड और दिल्ली जयपुर पोलो ग्राउंड से लेकर गरीबों की झुग्गियों तक सब कुछ हटाया जा रहा है। सरकार ने दिल्ली जयपुर पोलो ग्राउंड का कब्जा भी ले लिया है। यह मामला पहले से चल रहा था और अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद सरकार ने भूमि और विकास विभाग के माध्यम से कब्जा ले लिया। जिमखाना को खाली करने का नोटिस भी सरकार ने जारी किया है, हालांकि अदालत ने अभी रोक लगा दी है। लेकिन कहा जाता है कि सरकार अपने इरादे में दृढ़ है।


झुग्गियों का विध्वंस और सरकार की योजनाएं

इस बीच, लोक कल्याण मार्ग के आसपास स्थित तीन झुग्गियों पर बुलडोजर चल चुका है। भाईराम कैम्प, डीआईडी कैम्प और मस्जिद कैम्प को तोड़ दिया गया है। जब भी सरकार ऐसी झुग्गियों को तोड़ती है, तो कहा जाता है कि लोगों को कहीं और बसाने का इंतजाम किया गया है। लेकिन अक्सर ये इंतजाम वास्तविकता में नहीं होते हैं। झुग्गियों में रहने वाले लोग अपनी छोटी-मोटी नौकरियों और रोजगार के लिए वहीं रहते हैं, इसलिए वे कहीं और नहीं जा पाते। इस प्रकार, भूगोल में बदलाव हो रहा है, लेकिन क्या सरकार के पास कोई बड़ी योजना है या यह सब कुछ सरकारी इमारतों के निर्माण के लिए किया जा रहा है?