प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी भर्ती नियमों में बदलाव के खिलाफ अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन धरना
धरने का आरंभ
प्रयागराज में, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती नियमों में बदलाव के खिलाफ बेरोजगार अभ्यर्थियों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। इन अभ्यर्थियों की मांग है कि पुरानी भर्ती नियमावली को बहाल किया जाए और 23,775 रिक्त पदों पर शीघ्र विज्ञापन जारी किया जाए।
नियमों में बदलाव का विरोध
सिविल लाइंस स्थित धरना स्थल पर विभिन्न जनपदों से आए अभ्यर्थियों ने कहा कि नई नियमावली लागू होने से कई योग्य अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। उनका कहना है कि आयोग को 1992 की भर्ती नियमावली के आधार पर विज्ञापन जारी करना चाहिए, ताकि सभी पात्र अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।
अभ्यर्थियों की चिंताएं
युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में अब तक टीजीटी और पीजीटी की नियुक्तियां 1992 की नियमावली के तहत होती रही हैं। लेकिन आयोग ने 2025 में बिना किसी पूर्व सूचना के नई नियमावली लागू कर दी है, जिससे पांच लाख से अधिक बेरोजगार अभ्यर्थियों पर असर पड़ा है।
नई नियमावली की समस्याएं
अभ्यर्थियों का आरोप है कि नई नियमावली के तहत पीजीटी भर्ती में बीएड को अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि उनकी मांग है कि इसे समाप्त किया जाए। इसके अलावा, प्राविधिक कला, हिंदी, अंग्रेजी, शारीरिक शिक्षा, संगीत और गृह विज्ञान जैसे विषयों के अभ्यर्थियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
आंदोलन की निरंतरता
अभ्यर्थियों ने आयोग से पुरानी नियमावली को लागू करते हुए शीघ्र भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों में संशोधन वापस नहीं लिया गया, तो कई योग्य अभ्यर्थी सरकारी सेवा के अवसर से वंचित रह जाएंगे।
अनिल सिंह ने बताया कि इसी मांग को लेकर जून में भी आंदोलन किया गया था, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों ने फिर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक आयोग पुरानी नियमावली को बहाल नहीं करता और भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं करता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
