प्रशांत किशोर का चुनावी सफर: राजनीति में नई भूमिका और रणनीतियाँ
प्रशांत किशोर की नई राजनीतिक दिशा
प्रशांत किशोर ने चुनावी रणनीति के क्षेत्र से खुद को अलग कर लिया है। 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। इसके बाद, उन्होंने तमिलनाडु में फिल्म अभिनेता विजय की नई पार्टी के गठन में सहायता की, लेकिन अपनी संस्था आईपैक से वे अलग हो गए। अब, उन्होंने बिहार में जन सुराज अभियान शुरू किया और एक राजनीतिक पार्टी बनाई। वर्तमान में, वे बिहार की बांकीपुर सीट से विधायक हैं और चुनाव प्रबंधन का कार्य भी करेंगे, लेकिन यह सीमित रूप से और कुछ विशेष पार्टियों या नेताओं के लिए होगा।
सपा और एनसीपी के साथ संभावित सहयोग
प्रशांत किशोर ने महाराष्ट्र में एनसीपी की सुनेत्रा पवार की पार्टी के लिए काम करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, वे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की मदद भी कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, सपा ने उनसे संपर्क किया है, क्योंकि पार्टी के नेता उनकी ब्राह्मण पहचान का लाभ उठाना चाहते हैं। 2017 के चुनाव में, उन्होंने सपा और कांग्रेस के गठबंधन के लिए काम किया था, लेकिन उस चुनाव में दोनों पार्टियाँ हार गई थीं।
सपा को उम्मीद है कि अगर प्रशांत किशोर उनके लिए काम करते हैं, तो इससे उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों में सकारात्मक संदेश जाएगा। जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर सपा की मदद के लिए तैयार हैं। कांग्रेस में भी उनके प्रति कोई आपत्ति नहीं है। उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी वाड्रा ही प्रमुख निर्णय लेंगी। अखिलेश यादव ने भी ब्राह्मणों को लुभाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं।
भविष्य की राजनीतिक चुनौतियाँ
प्रशांत किशोर ने एनसीपी के लिए भी काम करना शुरू कर दिया है। हाल ही में, वे मुंबई में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार से मिले। सुनेत्रा पवार चाहती हैं कि उनके बेटे पार्थ को मराठा राजनीति का उत्तराधिकारी बनाया जाए। पार्थ को एकनाथ शिंदे और उनके बेटे श्रीकांत शिंदे की चुनौती का सामना करना होगा, साथ ही शरद पवार खेमे की ओर से रोहित पवार की चुनौती भी झेलनी होगी।
