प्रियंका गांधी का केंद्र सरकार पर हमला: युवाओं के मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
लोकसभा में प्रियंका गांधी का बयान
नई दिल्ली - लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के युवाओं, विशेषकर जेनरेशन Z का विश्वास जीतना है, तो उन्हें सोशल मीडिया वीडियो के लिए फोन कैमरे का नहीं, बल्कि अपने दिल का एंगल बदलना होगा।
प्रियंका गांधी ने कहा, "आप प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटा सकते हैं, लेकिन उनके सवालों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। सरकार को अपनी नीयत में सुधार करना होगा और अपनी साख को पुनः प्राप्त करना होगा।" उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में व्यापक बदलाव, शिक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञों की भागीदारी, रोजगार सृजन और नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि केवल विशेषज्ञ समितियों का गठन समस्या का समाधान नहीं करेगा, बल्कि प्रधानमंत्री को ठोस कदम उठाने होंगे।
इस बहस के दौरान प्रियंका गांधी की नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के प्रति की गई टिप्पणी पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रह्लाद जोशी और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रियंका गांधी से अपने दावों के समर्थन में सबूत पेश करने की मांग की। जोशी ने उनकी टिप्पणियों का खंडन करते हुए उन्हें सदन से हटाने की मांग की। जब प्रियंका गांधी ने कहा कि वह अपने दावों को प्रमाणित करेंगी, तब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए चर्चा को केवल विधेयक तक सीमित रखने की सलाह दी। प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने 2024 में पेपर लीक रोकने के लिए कानून लाया था, लेकिन अब तक एक भी आरोपी को सजा नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि "छात्रों के खिलाफ फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन पेपर लीक करने वालों के खिलाफ यही तकनीक अब तक लागू नहीं की गई।"
उन्होंने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित समिति के सदस्यों की योग्यता पर भी सवाल उठाए। प्रियंका गांधी ने छात्र आंदोलनों के दौरान बल प्रयोग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि घायल छात्रों के माता-पिता और पूरा देश यह जानना चाहता है कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन और एके-47 के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी। उन्होंने कहा, "क्या छात्र आतंकवादी थे? छात्रों पर पैलेट गन और एके-47 चलाने की जरूरत क्या थी? कांग्रेस ही नहीं, पूरा देश जानना चाहता है कि यह आदेश किसने दिया।"
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि देश की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह विफल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों छात्रों को प्रभावित किया है, लेकिन पेपर लीक माफिया के खिलाफ किसी को सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि छात्रों का व्यवस्था पर से भरोसा उठता जा रहा है। योग्यता पर पैसे का प्रभाव हावी हो रहा है और युवा चाहते हैं कि उनके भविष्य को खतरे में डालने वाली व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि छात्र केवल जवाबदेही तय करने और परीक्षा में गड़बड़ियों के जिम्मेदार लोगों को हटाने की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी आवाज सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने सरकार पर रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए जनसंपर्क (पीआर) और नैरेटिव बदलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और व्यापक सुधार लागू करने होंगे।
