बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की चुनौती और राजनीतिक प्रतिष्ठा का दांव
प्रशांत किशोर का चुनावी मैदान में उतरना
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, जिन्होंने बांकीपुर विधानसभा सीट से पांच बार जीत हासिल की है, अब राज्यसभा में जाने के बाद इस सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव होने जा रहा है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने इस सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। उनकी पार्टी ने उनके नाम की आधिकारिक घोषणा रविवार, 5 जुलाई को करने का निर्णय लिया है।
प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने से बांकीपुर सीट अब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठा का विषय बन गई है। नितिन नबीन की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा दांव पर है, वहीं यह भाजपा की एक सौ दिन पुरानी सरकार के कार्यों पर जनमत संग्रह के रूप में भी देखा जा रहा है। ध्यान देने योग्य है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार 25 जुलाई को अपने कार्यकाल के सौ दिन पूरे कर रही है, और चुनाव इसके पांच दिन बाद होगा।
प्रशांत किशोर स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ बिहार के समग्र मुद्दों को भी उठाने की योजना बना रहे हैं, जिसमें आर्थिक स्थिति और भरत तिवारी का इनकाउंटर जैसे मुद्दे शामिल हैं।
राजद की दुविधा और संभावित परिणाम
मुख्य विपक्षी पार्टी राजद के लिए यह एक कठिन स्थिति है। यदि वे प्रशांत किशोर का समर्थन करते हैं और वह मजबूती से चुनाव लड़कर जीत जाते हैं या हार का अंतर बहुत कम रखते हैं, तो जन सुराज पार्टी बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी बन सकती है। यदि प्रशांत किशोर जीतते हैं, तो वे विधानसभा में एकमात्र विपक्षी नेता बन जाएंगे, जिससे उनकी पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी।
हालांकि, यदि तेजस्वी यादव समर्थन नहीं करते हैं, तो प्रशांत किशोर को यह प्रचारित करने का अवसर मिलेगा कि राजद की प्राथमिकता भाजपा को हराने की नहीं है। यह भी संभव है कि राजद समर्थन न दे, लेकिन कांग्रेस समर्थन दे दे, जिससे विपक्ष के बिखराव का संदेश जाएगा।
एक और खतरा यह है कि यदि राजद और कांग्रेस अपने उम्मीदवार उतारते हैं और फिर भी प्रशांत किशोर दूसरे स्थान पर रहते हैं, तो मुख्य विपक्षी गठबंधन का मिथक टूट जाएगा। बांकीपुर क्षेत्र कायस्थ और सवर्ण बहुल है, जहां भाजपा ने 1995 से लगातार नौ बार जीत हासिल की है। इसलिए, प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन वे एक नया मॉडल पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पिछले साल चुनाव न लड़ने का दाग भी मिटेगा।
