बांग्लादेश का मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने पर सकारात्मक रुख
बांग्लादेश का मक्का रक्षा समझौते पर बयान
बांग्लादेश ने स्पष्ट किया है कि उसे सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के साथ मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने में कोई खतरा नहीं दिखता है, और यह अन्य साझेदार देशों के साथ उसके संबंधों को प्रभावित नहीं करेगा। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि यह समझौता सामूहिक सुरक्षा का एक ढांचा प्रस्तुत करता है, जिसमें यह प्रावधान है कि यदि इनमें से किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे सभी पर हमला माना जाएगा।
यह बयान विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के संसद में दिए गए उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि बांग्लादेश को मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने का निमंत्रण मिलता है, तो वह इसे सकारात्मक रूप से विचार करेगा। उन्होंने इसे 'हमारे मुस्लिम परिवार' का आंतरिक मामला बताते हुए कहा कि इस पर अन्य लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
कबीर ने सऊदी अरब के राजदूत अब्दुल्ला जफर बिन अबियाह के साथ मुलाकात के बाद कहा, 'यह एक अनूठा समझौता है, जो नए अवसरों का निर्माण करता है।' उन्होंने यह भी बताया कि बांग्लादेश इस मुद्दे पर चर्चा कर रहा है और सभी द्विपक्षीय साझेदारों के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है।
उन्होंने कहा, 'हमें मौजूदा अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य के अनुसार अपनी विदेश नीति और सुरक्षा सहयोग को लचीले तरीके से आगे बढ़ाना चाहिए।' कबीर ने पिछले सप्ताह जेद्दा में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद सहित कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिसमें यह समझौता प्रमुख चर्चा का विषय था।
विदेश मंत्री रहमान ने संसद में कहा था कि बांग्लादेश इस समझौते को सकारात्मक रूप से देखता है और इसे मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला मानता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की मजबूत विदेश नीति के कारण बांग्लादेश आज सम्मान के साथ खड़ा है।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए किया गया। इस समझौते का उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सभी घटनाक्रमों पर नजर रखता है जो उसकी सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का इस समझौते में शामिल होना उसकी गुटनिरपेक्षता की नीति से विचलन है, जो उसके भारत के साथ संबंधों को जटिल बना सकता है।
