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बिहार में राजनीतिक टकराव: लालू परिवार की सुरक्षा में कटौती

बिहार में भाजपा की सरकार बनने के बाद राजनीतिक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। राबड़ी देवी को बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया है और लालू प्रसाद तथा तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कटौती की गई है। इस स्थिति ने यादव वोट बैंक को और मजबूत किया है। जानें इस राजनीतिक बदलाव के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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बिहार में राजनीतिक टकराव: लालू परिवार की सुरक्षा में कटौती

बिहार में राजनीतिक स्थिति का बदलाव


बिहार में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, नीतीश कुमार की सहिष्णुता की राजनीति पीछे छूट गई है और अब टकराव की राजनीति का दौर शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने राबड़ी देवी को उनके सरकारी बंगले को खाली करने का नोटिस जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि उन्हें हर हाल में बंगला छोड़ना होगा। इसके बाद, लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की सुरक्षा में भी कमी की गई है। लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में मिली जेड प्लस सुरक्षा घटाकर वाई प्लस कर दी गई है, जबकि तेजस्वी की सुरक्षा में भी कमी आई है।


इस स्थिति के बाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने अपनी सुरक्षा वापस ले ली और सुरक्षाकर्मियों को बंगले से विदा कर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने अपने समर्थकों को एकत्रित करने के लिए अपील करना शुरू कर दिया।


लालू प्रसाद के परिवार के खिलाफ हो रही लगातार कार्रवाई से यादव वोट बैंक और अधिक मजबूती से उनके परिवार के साथ जुड़ रहा है। यदि 14 प्रतिशत यादव राजद के साथ रहते हैं, तो 18 प्रतिशत मुस्लिम भी पूरी तरह से उनके साथ रहेंगे। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा की सरकार ने यादव वोटों के टूटने की संभावनाओं को समाप्त कर दिया है, जिससे राजद की ताकत में वृद्धि हुई है। यह ध्यान देने योग्य है कि बिहार की राजनीति में राजद अब भी एक महत्वपूर्ण शक्ति है। उनके पास 25 सीटें हैं और उनके नेतृत्व वाले गठबंधन की 35 सीटें हैं, लेकिन उनके पास 38 प्रतिशत वोट हैं।


नीतीश कुमार के हटने से जदयू कमजोर हुई है, जिससे जातियों का नया समीकरण बन रहा है। जमीनी स्तर पर जातियां नए समीकरण के लिए तैयार हो रही हैं। यदि कुछ जातियों का वोट भी राजद की ओर मुड़ता है, तो इससे उन्हें बड़ा लाभ हो सकता है।